
खरोरा स्थित एक मशरूम कंपनी में महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने मारा छापा,पुरूष,महिला और बच्चो समेत 97लोगों का रेस्क्यू किया गया ,4से 5 महीनो से बंधक बनाकर रखा गया था।



महिला बाल विकास विभाग द्वारा बताया गया कि खरोरा स्थित उमाश्री राइस मिल के अंदर मोजो मशरूम फैक्ट्री संचालित है। हमें सूचना मिली थी कि यहां यूपी ,बिहार ,झारखंड और एमपी के कुछ मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है। टीम ने पुलिस की मदद से वहां छापा मारा। देखा कि वहां सैकडों मजदूर अपने बच्चों के साथ दयनीय स्थिति में रह रहे हैं। सभी को रेस्क्यू कर इंडोर स्टेडियम में लाया गया। कंपनी के संचालकों को भी यहां बुलाकर उनसे मजदूरों के पैसे दिलाए गए। और सभी मजदूरों को उनके घर भेज दिया गया।
खरोरा के बाहरी इलाके में स्थित एक मशरूम फैक्ट्री से जो दृश्य सामने आया, उसने न सिर्फ प्रशासन बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। एक गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में 97 मजदूरों को बंधन से मुक्त कराया गया। मजदूरों के बयानों ने खुलासा किया कि इस आधुनिक फैक्ट्री की दीवारों के पीछे एक बंधुआ मजदूरी का अंधकारमय संसार पल रहा था।
“हमें यहां जानवरों की तरह रखा गया था” – मजदूरों की आंखों में छलकते आंसू
रेस्क्यू के बाद राहत शिविर में रखे गए कुछ मजदूरों से जब हमारी टीम ने बातचीत की, तो उनकी आंखों में राहत के साथ पीड़ा भी साफ झलक रही थी।
राजू निषाद (25), बिहार निवासी, ने बताया:
> “हमें कहा गया था कि यहां काम मिलेगा, खाना और रहने की सुविधा मिलेगी, लेकिन यहां आने के बाद सब कुछ छीन लिया गया। खाना भी सही टाइम पर नही मिलता था दिन मे एक टाइम खाना दिया जाता था। मोबाइल फोन ले लिया गया, घर बात करने नहीं दिया जाता था। जो बोलता था, उसे पीटा जाता था।”
राधिका बाई (30), महासमुंद जिले की निवासी, कहती हैं:
> “हमें सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक मशरूम तोड़ने और पैकिंग करने का काम दिया जाता था। महिलाएं बीमार भी हो जातीं तो भी छुट्टी नहीं मिलती थी। कई बार खाना भी ठीक से नहीं मिलता था।”
बंधक, शोषण और डर का माहौल
मजदूरों के अनुसार, फैक्ट्री में सीसीटीवी के जरिए हर समय निगरानी होती थी। बाहर जाने की अनुमति नहीं थी, और फैक्ट्री के चारों ओर सुरक्षाकर्मी तैनात थे। वेतन देने का वादा तो किया गया, लेकिन महीनों से किसी को भुगतान नहीं हुआ।
रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे हुआ?
इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय एक सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने गुप्त रूप से मजदूरों से संपर्क किया और प्रशासन को सूचित किया।
खरोरा थाना प्रभारी,ने हमारे संवाददाता को बताया:
> “हमें सूचना मिली थी कि यहां मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है। हमने श्रम विभाग के साथ मिलकर छापा मारा और मौके से 97 लोगों को सुरक्षित निकाला। प्रारंभिक जांच में मानव तस्करी और श्रम कानून उल्लंघन की पुष्टि हुई है।”


क्या था मशरूम कंपनी का सच?
यह मशरूम कंपनी पिछले 3 वर्षों से खरोरा क्षेत्र में सक्रिय थी। कंपनी का रजिस्ट्रेशन एक फर्जी नाम पर किया गया था। अब जांच में यह भी सामने आ रहा है कि यह फैक्ट्री पहले भी बिहार और झारखंड के ग्रामीण इलाकों से मजदूर लाकर काम पर लगाती थी।
प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होगी?
प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। मालिक और तीन प्रबंधकों के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें बंधुआ श्रम (Bonded Labour), मानव तस्करी (Human Trafficking), गैरकानूनी हिरासत (Illegal Confinement) और शारीरिक शोषण (Physical Assault) शामिल हैं।
मानवाधिकार संगठन और श्रमिक यूनियन की मांगें
> “यह एक बहुत बड़ा मामला है। ऐसे फैक्ट्री मालिकों को केवल जेल नहीं, बल्कि उदाहरण स्वरूप सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई गरीब मजदूर का शोषण न कर सके।”
अंतिम शब्द: सिस्टम की चूक या सुनियोजित शोषण?
यह घटना सिर्फ एक फैक्ट्री की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की पोल खोलती है जहां गरीब मजदूरों को रोजगार के नाम पर फंसाया जाता है और फिर उनका शोषण किया जाता है। यह जरूरी है कि ऐसे मामलों को दबाने की बजाय समाज और प्रशासन मिलकर कार्रवाई करे, ताकि ‘विकास’ के नाम पर ‘बंधुआ मजदूरी’ फिर से न जन्म ले।

सूत्रों के अनुसार, फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों की हालत अत्यंत दयनीय थी। कई मजदूरों ने बताया कि उन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला, उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए थे, और उन्हें फैक्ट्री परिसर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। मजदूरों ने यह भी बताया कि विरोध करने पर गार्ड और मैनेजमेंट के लोग उनके साथ मारपीट करते थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन स्थानीय प्रशासन, महिला बाल विकास विभाग ,श्रम विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा चलाया गया, जिसमें गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। रेस्क्यू किए गए मजदूरों को अस्थायी राहत शिविर में रखा गया है और मेडिकल जांच की जा रही है।
खरोरा पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी ने बताया, “हमने फैक्ट्री मालिक और प्रबंधकों के खिलाफ बंधक बनाकर मजदूरी कराने, शारीरिक शोषण और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
मामले ने श्रम कानूनों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और श्रमिक यूनियनों ने इस घटना की निंदा करते हुए सरकार से दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
