
हथबंद स्कूल में शिक्षकों की लापरवाही, बच्चों का भविष्य संकट में!
स्थान: हथबंद, जिला बलौदाबाज़ार
तारीख: 10 जुलाई 2025
रिपोर्टर:अनिल कुमार भट्ट तिल्दा नेवरा रायपुर
हथबंद गांव का शासकीय प्राथमिक विद्यालय इन दिनों गंभीर शिक्षण संकट से गुजर रहा है। स्कूल में शिक्षकों की नियमित अनुपस्थिति और समय से पहले स्कूल बंद करना अब आम बात हो गई है, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

अभिभावको का आरोप है हमारे बच्चे रोज स्कूल जाते हैं लेकिन वहां उन्हें न तो पढ़ाई मिलती है, न ही अनुशासन। कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई,
गांववासियों ने जिला शिक्षा अधिकारी से तत्काल जांच कर शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई को लेकर शासन की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित है
शिक्षा एक ऐसा आधार है जिस पर समाज और राष्ट्र का भविष्य टिका होता है। परंतु यदि वही शिक्षा व्यवस्था लापरवाही और उदासीनता की शिकार हो जाए, तो यह न केवल छात्रों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
बलौदा बाजार के हथबंद स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट शासकीय विद्यालय में शिक्षकों की लापरवाही की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। छात्रों और अभिभावकों के अनुसार, शिक्षक नियमित स्कूल नहीं आते, और जो आते हैं, वे समय से पहले छुट्टी दे देते हैं या पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं लेते। छात्रों का यह भी कहना है कि जो पढ़ाया जाता है, वह समझ में नहीं आता, जिससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
यह स्थिति निंदनीय ही नहीं, बल्कि खतरनाक है। एक ओर सरकार शिक्षा को सुधारने और स्कूलों को ‘उत्कृष्ट’ बनाने की बात कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। यह छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
स्थानीय अभिभावक कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यदि यही रवैया जारी रहा, तो न केवल छात्रों का शैक्षणिक स्तर गिर जाएगा, बल्कि वे आत्मविश्वास भी खो बैठेंगे।
प्रशासन और शिक्षा विभाग को तत्काल संज्ञान लेकर:
स्कूल में आकस्मिक निरीक्षण करने चाहिए,
शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी होनी चाहिए,
और दोषी शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
आज जरूरत है कि हम शिक्षा को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि इसे एक नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी समझें। शिक्षक केवल पठन-पाठन ही नहीं करते, वे समाज का भविष्य गढ़ते हैं। यदि वे लापरवाही बरतेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा?


Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
