मैनपाट में बॉक्साइड खदान विस्तार पर बवाल: जनसुनवाई में उग्र विरोध, पंडाल उखाड़ा – ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

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मैनपाट में बॉक्साइड खदान विस्तार पर बवाल: जनसुनवाई में उग्र विरोध, पंडाल उखाड़ा – ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
अम्बिकापुर | विशेष रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के मशहूर पर्यटन स्थल और पहाड़ी क्षेत्र मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइड खदान विस्तार परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर पहुँच गया है। रविवार को कंडराजा और उरगा क्षेत्र के लिए नर्मदापुर मिनी स्टेडियम में आयोजित प्रशासनिक जनसुनवाई में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि आक्रोशित ग्रामीणों ने पूरा पंडाल ही उखाड़ दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी और प्रशासनिक तैयारी के बावजूद विरोध प्रदर्शन अनियंत्रित हो गया और जनसुनवाई बीच में ही रोकनी पड़ी।




🔴 परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

जनसुनवाई शुरू होने से पहले ही असंतुष्ट ग्रामीणों की भारी भीड़ स्थल पर जमा हो गई। ग्रामीणों का कहना था कि पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में संचालित बॉक्साइड खदानों ने मैनपाट के प्राकृतिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

ग्रामीणों ने निम्न समस्याएँ प्रमुखता से उठाईं—

भूमि की उर्वरता में लगातार गिरावट

झरनों और जलस्रोतों का सूखना

भूजल स्तर का तेजी से नीचे जाना

वन क्षेत्र में कमी और पर्यावरणीय क्षरण

स्थानीय कृषि और आजीविका पर मार


ग्रामीणों का स्पष्ट कहना था कि खदान विस्तार का सीधा असर उनके जल–जंगल–जमीन पर पड़ेगा और वे इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

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🔴 ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ खतरे में

मैनपाट को अपनी हरियाली, प्राकृतिक सौंदर्य, पहाड़ी वादियों और ठंडी जलवायु के कारण ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है। यहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है।

स्थानीय लोगों का तर्क है कि:

खदानों के विस्तार से पर्यटन प्रभावित होगा

धूल, प्रदूषण और पहाड़ी कटाव बढ़ेगा

क्षेत्र की खूबसूरती और प्राकृतिक संसाधन नष्ट हो सकते हैं

हाथियों के प्रवास मार्ग पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा

मानव–हाथी संघर्ष बढ़ने का खतरा पैदा हो जाएगा





🔴 रतनी नाग के नेतृत्व में जबरदस्त विरोध

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग कर रही थीं। उन्होंने खदान कंपनी और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार—

> “जनसुनवाई से पहले कुछ प्रभावित ग्रामीणों को शराब पिलाकर उनकी राय बदलने की कोशिश की गई, ताकि वे परियोजना के पक्ष में दिखाई दें। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।”



रतनी नाग ने इसे “योजना को जबरन लागू करने की साजिश” बताया और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।




🔴 जनसुनवाई में हंगामा – पंडाल उखाड़ा, कार्यक्रम रद्द

कार्यक्रम के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि प्रशासन को जनसुनवाई रोकनी पड़ी। पुलिस बल ने स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने पंडाल उखाड़ते हुए जनसुनवाई को पूरी तरह बाधित कर दिया। भीड़ के बढ़ते आक्रोश के बीच अधिकारियों को बैकफुट पर आना पड़ा और कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।




🔴 आगे क्या? ग्रामीणों की चेतावनी – बड़ा आंदोलन होगा

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है—

> “यदि प्रशासन या कंपनी खदान विस्तार पर आगे बढ़ने की कोशिश करती है, तो हम बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।”



उधर, प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति की समीक्षा की जाएगी और आगे क्या कदम उठाना है, इस पर पुनर्विचार किया जाएगा।




🔴 निष्कर्ष

मैनपाट में बॉक्साइड  खदान विस्तार का विरोध सिर्फ पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
ग्रामीणों के अनुसार यह संघर्ष उनकी मिट्टी, पानी, जंगलों और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
वहीं प्रशासन विकास और रोजगार के अवसरों का हवाला देकर परियोजना आगे बढ़ाना चाहता है।

मैनपाट की पहाड़ियों पर खनन विस्तार का विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

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