
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की डेडलाइन 7 दिन बढ़ी
12 राज्यों में वोटर वेरिफिकेशन अब 11 दिसंबर तक, फाइनल लिस्ट 14 फरवरी 2026 को
नई दिल्ली | 30 नवंबर 2025
देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर नागरिकों की बढ़ती परेशानियों और काम के बढ़े हुए दबाव के बीच चुनाव आयोग ने एक बड़ी राहत दी है। आयोग ने SIR की समय सीमा 7 दिन बढ़ाने का ऐलान किया है।
अब वोटर वेरिफिकेशन (एन्यूमरेशन पीरियड) 4 दिसंबर की बजाय 11 दिसंबर 2025 तक चलेगा। साथ ही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट भी अब 9 दिसंबर की जगह 16 दिसंबर 2025 को जारी की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।

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📌 क्या है SIR और क्यों चल रही है यह प्रक्रिया?
SIR यानी Special Intensive Revision वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची का विशेष तौर पर गहन पुनरीक्षण करता है। इसमें—
नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं
गलतियों को सुधारा जाता है
मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं
घर-घर जाकर BLO मतदाता विवरण का सत्यापन करते हैं
बिहार में SIR पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि 28 अक्टूबर 2025 से छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल समेत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया जारी है।

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📊 51 करोड़ मतदाताओं तक 99.53% फॉर्म पहुंचाए जा चुके
चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार—
कुल 51 करोड़ मतदाताओं के लिए गणना फॉर्म तैयार किए गए
इनमें से 99.53% फॉर्म लोगों तक पहुंच चुके हैं
लगभग 79% फॉर्म का डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है
यानी BLO द्वारा घर-घर से एकत्र किए गए नाम, पते और विवरण अब ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज हो चुके हैं
आयोग का कहना है कि डिजिटलीकरण रिकॉर्ड गति से हो रहा है, और इसी कारण अंतिम सूची को फरवरी में प्रकाशित करना संभव हो पाएगा।

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⚠️ SIR को लेकर विपक्ष हमलावर—दबाव में BLO की मौतें ‘मर्डर’ जैसी’
SIR के कार्यभार को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस ने इसे ‘अमानवीय’ करार दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि—
पिछले 20 दिनों में 26 BLO की मौत हो चुकी है
यह मौतें “काम के दबाव से हुईं हत्या” जैसी हैं
सुप्रिया ने गोंडा (UP) के BLO विपिन यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि
उनके परिवार द्वारा दावा किया गया है कि
“उन्हें वोटर लिस्ट से पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम हटाने का दबाव दिया जा रहा था।”
इन आरोपों ने SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल को और गरम कर दिया है।

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⚖️ SIR मामला सुप्रीम कोर्ट में—2 दिसंबर को फिर सुनवाई
SIR के खिलाफ तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल की सरकारें सुप्रीम कोर्ट जा चुकी हैं। उनकी याचिकाओं पर लगातार सुनवाई चल रही है।
चुनाव आयोग का पक्ष
विपक्ष जानबूझकर डर का माहौल बना रहा है
SIR मतदाता सूची की शुद्धता के लिए जरूरी और संवैधानिक दायित्व है
अगली सुनवाई: 2 दिसंबर 2025
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🔍 क्यों बढ़ाई गई SIR की डेडलाइन?
सूत्रों के अनुसार डेडलाइन बढ़ाने के पीछे कई कारण हैं—
1. कई राज्यों में फॉर्म वितरण में देरी
2. ग्रामीण क्षेत्रों में BLO की कमी
3. भारी राजनैतिक विवाद और याचिकाएँ
4. तकनीकी प्रक्रिया का डिजिटलीकरण अपेक्षा से अधिक समय ले रहा है
आयोग चाहता है कि मतदाता सूची बिना किसी गलती के और पूर्ण रूप से तैयार हो।

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🗳️ अगला क्या?
11 दिसंबर: वोटर वेरिफिकेशन समाप्त
16 दिसंबर: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी
14 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित
इसके बाद ही आने वाले विधानसभा चुनावों और 2026 के प्रारंभिक चुनावी कार्यक्रमों की दिशा और स्पष्ट होगी।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
