
बिलाड़ी गांव में धूमधाम से मनाया गया पोला-पिथौड़ा पर्व
बिलाड़ी (तिल्दा-नेवरा, जिला रायपुर):
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के ग्राम बिलाड़ी में पोला-पिथौड़ा पर्व बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। यह पर्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे ग्रामीणों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया।

ग्राम बिलाड़ी में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें मिट्टी के नंदिया बैल और पोला की विशेष पूजा की जाती है। इस अवसर पर बिटिया लोग अपने मायके लौटकर अपने पिता के घर त्योहार मनाती हैं, जिससे पारिवारिक और सांस्कृतिक संबंध और भी प्रगाढ़ हो जाते हैं।

पोला पर्व के दिन ग्रामीण महिलाएं और बच्चियां मिट्टी से बने पोला और बैलों की पूजा-अर्चना करती हैं। परंपरागत व्यंजन ठेठरी, खुरमी, व अन्य मिष्ठान्न बनाकर भोग स्वरूप अर्पित किए जाते हैं।

सांझ होते ही बेटियां अपने बचपन की यादों को ताजा करते हुए उन मिट्टी के पोला को ‘भांठा’ में ले जाकर पटख देती हैं। इसके पश्चात खो-खो, कबड्डी, पिट्ठुल जैसे पारंपरिक खेलों का आयोजन होता है, जिसमें हर उम्र के लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और त्योहार का भरपूर आनंद उठाते हैं।

गांववासियों का कहना है कि यह पर्व न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता, महिला सम्मान और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक भी है। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि ग्राम्य जीवन में आज भी परंपराएं जीवित हैं और लोग अपनी संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं।



Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
