
बिलासपुर: वंदे भारत एक्सप्रेस की सफाई के दौरान बड़ा हादसा, ठेका कर्मी करंट से झुलसा, हालत नाजुक
बिलासपुर, 24 अगस्त।
बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में शनिवार को एक गंभीर हादसा हो गया, जब वंदे भारत एक्सप्रेस के एक कोच की सफाई कर रहे ठेका कर्मी को करंट लग गया। हादसे में घायल हुआ युवक प्रताप सिंह नामक सफाई कर्मचारी है, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उसे तत्काल इलाज के लिए बिलासपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
हादसा कैसे हुआ?
सूत्रों के अनुसार, प्रताप सिंह रोज की तरह कोच की सफाई कर रहा था। बताया जा रहा है कि हादसा उस समय हुआ जब वह अतिरिक्त कोच की सफाई के लिए कोच के भीतर गया था। इसी दौरान उसे तेज़ विद्युत प्रवाह ने चपेट में ले लिया। घटना के वक्त मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तुरंत बिजली आपूर्ति बंद कराई और प्रताप को बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया।
सुरक्षा इंतज़ामों पर उठे सवाल
इस हादसे ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों और डिपो में कार्यरत अन्य कर्मचारियों का कहना है कि सफाई कार्य के दौरान न तो बिजली पूरी तरह बंद की गई थी और न ही किसी प्रकार की चेतावनी या सुरक्षा गियर उपलब्ध कराया गया था। इससे साफ होता है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही थी।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में आक्रोश
घटना के बाद रेलवे डिपो परिसर में तनाव का माहौल है। स्थानीय लोगों और कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि यह दुर्घटना सीधे तौर पर रेलवे अधिकारियों की लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि ठेका कर्मचारियों के साथ अक्सर सुरक्षा में लापरवाही बरती जाती है और उन्हें बिना पर्याप्त ट्रेनिंग या सुरक्षा उपकरणों के खतरनाक कामों में लगाया जाता है।
रेलवे प्रशासन मौन
घटना के 24 घंटे बीतने के बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इससे लोगों में और भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों की मांग है कि इस घटना की जांच कराई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और सफाई कर्मियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
क्या कहता है नियम?
रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी कोच या यार्ड में सफाई या मरम्मत कार्य करते समय बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद करना अनिवार्य है। इसके अलावा सफाईकर्मियों को इंसुलेटेड दस्ताने, बूट, और अन्य सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए। यदि इन नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।
निष्कर्ष
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि सुरक्षा उपायों की अनदेखी कितनी महंगी पड़ सकती है। अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं। रेलवे प्रशासन को चाहिए कि वह इस घटना से सीख लेकर सख्त सुरक्षा मानक लागू करे और ठेका कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
