बिलाड़ी गांव मे तिजा पोला पर्व के अवसर पर भोजली विषर्जन किया गया

Img 20250823 164839 11781292985836652610 1024x473




भोजली माता का विसर्जन: तिजा पोला पर्व पर बिलाड़ी गांव में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह का जन सैलाब

📍 तिल्दा-नेवरा,

बिलाड़ी | तिल्दा टाइम्स CG न्यूज | रिपोर्ट: अनिल कुमार भट्ट



बिलाड़ी गांव में परंपरागत आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ भोजली माता का विसर्जन तिजा पोला पर्व के पावन अवसर पर बड़ी धूमधाम से किया गया। गांव की माताओं और बहनों ने भारी संख्या में भाग लेकर इस आयोजन को भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण बना दिया।

Img 20250823 164859 13188952819365049226 1024x473



भोजली माता की बुआई कृष्ण जन्माष्टमी के दिन यानी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की गई थी। गेहूं और जौ के दानों को बांस की टोकरी में मिट्टी के साथ बोकर भोजली माता की स्थापना की गई। इस कार्य के लिए पारंपरिक रूप से कुम्हार के घर से पवित्र मिट्टी, तथा गांव के महतों (सम्मानित व्यक्ति) के घर से टोकरी लाई जाती है, जो सामुदायिक सहभागिता और सम्मान का प्रतीक है।

Img 20250823 1638204625100849020050400 473x1024



नौ दिनों तक माताओं और बहनों ने भक्ति भाव से भोजली माता की पूजा-अर्चना, सेवा और देखभाल की। इस दौरान बालिकाओं द्वारा पारंपरिक भोजली गीत गाए गए, जो इस लोक परंपरा में नई पीढ़ी को भी प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।

Img 20250823 164851 16966578727929846192 1024x473



भोजली के हरे पौधे अच्छी फसल, समृद्धि और मित्रता का प्रतीक माने जाते हैं।



आज तिजा पोला पर्व के दिन, परंपरानुसार भोजली माता को  तालाब में विधिपूर्वक ‘ठंडा’ (विसर्जन) किया गया।विसर्जन करने के बाद बांस के टोकरियों मे थोड़ा थोड़ा भोजली पौधे रखा जाता है ताकि वापस विसर्जन पश्चात भोजली पौधे से महिलाएं एक-दूसरे के कानों में भोजली के पौधे लगाकर ‘मितानी’ या ‘सखी’ बनने की रस्म निभाते है, जो आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

Img 20250823 164854 1347974486270602889 1024x473



गांव की गलियों से लेकर विसर्जन स्थल तक भक्ति गीतों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि गूंजती रही। पूरा वातावरण भक्ति और उत्सव से ओतप्रोत रहा।

Img 20250823 163828 17831254298434380423 1024x473



तिल्दा टाइम्स CG न्यूज से अनिल कुमार भट्ट की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह आयोजन बिलाड़ी गांव की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बना।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *