


श्रावण मास में घटारानी-जतमई माता मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, रोड पर गाड़ियों की लंबी कतारें, मंदिर में पैर रखने की भी जगह नहीं
गरियाबंद, छुरा (छत्तीसगढ़) – श्रावण मास के पावन अवसर पर गरियाबंद जिले के प्रसिद्ध घटारानी-जतमई माता मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सावन सोमवार और छुट्टी के दिन को देखते हुए रविवार-सोमवार को मंदिर प्रांगण श्रद्धा और आस्था से सराबोर हो गया। मंदिर परिसर में पैर रखने तक की जगह नहीं रही, वहीं मंदिर तक पहुंचने वाली सड़कें वाहनों की लंबी कतारों से पूरी तरह जाम हो गईं। श्रद्धालु सुबह से ही माता के दर्शन के लिए लाइन में लगे रहे ,यहाँ कि मनोरम दृश्य को देखते बनता था,सुन्दर छटा बिखेरती वह झरना ,सुन्दर जंगल पहाड़ जिसका आनंद लेते श्रद्धालु बहोत ही आनन्दित हो रहे थे

श्रावण मास के दौरान भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। यही कारण है कि इस महीने में श्रद्धालु बोलबम के जयकारों के साथ जल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और मार्ग में घटारानी-जतमई माता के दर्शन कर, उनका आशीर्वाद लेकर भुतेश्वर महादेव मंदिर में जल चढ़ाने जाते हैं। इस परंपरा को निभाने के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों सहित पड़ोसी राज्यों से भी भक्त बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।

भक्तों का मानना है कि घटारानी-जतमई माता के दर्शन मात्र से मन को असीम शांति और सुकून की अनुभूति होती है। मंदिर क्षेत्र की मनोरम वादियाँ और जलप्रपात की अनुपम छटा मन को मोहित कर देती है। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा का यह संगम श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आकर्षक बना हुआ है।
मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा व्यवस्था बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित संख्या के चलते पुलिस एवं प्रशासन को ट्रैफिक नियंत्रित करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।


श्रद्धालुओं का कहना है कि माता घटारानी और जतमई के मंदिर में आने से मन की हर चिंता दूर हो जाती है। यहां की पहाड़ी घाटियाँ और झरनों से बहता निर्मल जल भक्तों को आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक आनंद की अनुभूति कराता है। श्रद्धा, आस्था और प्रकृति के संगम का यह दृश्य श्रावण मास को और भी पावन बना देता है।
माना जा रहा है कि पूरे श्रावण मास में हर रविवार -सोमवार को यहां पर इसी तरह भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती रहेगी।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
