तिल्दा नेवरा के कार्मल पब्लिक स्कूल की फीस व किताब विवाद पर जांच तेज,31जुलाई को पहुंचेगी तीन सदस्यीय शिक्षा विभाग की टीम

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तिल्दा-नेवरा: कार्मल पब्लिक स्कूल की फीस व किताब विवाद पर जाँच तेज़, 31 जुलाई को पहुँचेगी तीन सदस्यीय टीम

रिपोर्टर – तिल्दा टाईम्स CG न्यूज संवाददाता
तिल्दा-नेवरा | 29 जुलाई 2025

तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के प्रतिष्ठित कार्मल पब्लिक स्कूल की कथित मनमानी फीस वसूली और महँगी किताबों की अनिवार्यता को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब गंभीर प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जाँच कमेटी गठित कर दी है, जो गुरुवार, 31 जुलाई को स्कूल पहुँचकर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन दोनों से संवाद करेगी।


जनजागरण समिति के सामाजिक कार्यकर्ता विजय हरिरामानी द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत यह आरोप सामने आया है कि स्कूल प्रबंधन ने छात्रों से वार्षिक उत्सव, आईडी कार्ड, डायरी और ग्रुप फोटो के नाम पर ₹700 प्रति छात्र अतिरिक्त शुल्क लिया है। इस वसूली से अनुमानित ₹10 से ₹14 लाख की अवैध राशि जमा की गई है, क्योंकि स्कूल में लगभग 1500 से 2000 छात्र पढ़ते हैं।

इसके अलावा स्कूल पर निम्नलिखित आरोप भी लगाए गए हैं:

निजी प्रकाशन की महँगी किताबें (₹5000–₹7000 तक) जबरन बिकवाना

स्कूल द्वारा अधिकृत दुकान से ही किताबें खरीदने का दबाव

पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव


नियमों की अनदेखी

छत्तीसगढ़ बोर्ड से संबद्ध स्कूलों को राज्य पाठ्यपुस्तक निगम की मुफ्त किताबें उपलब्ध करानी होती हैं, जबकि सीबीएसई/आईसीएसई स्कूलों को एनसीईआरटी की कम मूल्य वाली पुस्तकें चलानी होती हैं। इसके बावजूद महँगी निजी किताबें थोपने की लगातार शिकायतें मिली हैं।

अभिभावकों में भय का माहौल

कई अभिभावकों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि वे बच्चों को प्रताड़ना के डर से खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। वे चाहते हैं कि जांच हो लेकिन उनकी पहचान गुप्त रखी जाए।

प्रशासन की कार्रवाई

विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने सभी पहलुओं की गंभीरता को समझते हुए जांच समिति गठित की है, जिसमें तीन वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं। यह समिति 31 जुलाई को कार्मल पब्लिक स्कूल जाकर सभी पक्षों से बिंदुवार जानकारी लेगी और प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

हरिरामानी की प्रतिक्रिया

विजय हरिरामानी ने बातचीत में कहा:

यह केवल एक स्कूल की बात नहीं है। यह पूरा सिस्टम जवाबदेह है कि बच्चों की शिक्षा को एक व्यापारिक मॉडल न बनने दे। हमें उम्मीद है कि जाँच समिति निष्पक्ष और ठोस कदम उठाएगी।




₹700 प्रति छात्र की अतिरिक्त अवैध वसूली

₹5000–₹7000 तक की निजी किताबें थोपे जाने की शिकायत

टॉयलेट व पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी

31 जुलाई को तीन सदस्यीय जांच कमेटी का निरीक्षण तय

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