
रायगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी प्रगति पर प्रशासन सख्त, दो पंचायत सचिवों को नोटिस
रायगढ़। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही अब जिम्मेदार अधिकारियों के लिए भारी पड़ती दिखाई दे रही है। जिले में आवास निर्माण की धीमी प्रगति और जमीनी स्तर पर संदिग्ध स्थिति सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
जिला पंचायत रायगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत पठारे ने लैलूंगा क्षेत्र के औचक निरीक्षण के दौरान आवास निर्माण कार्यों की बेहद धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। निरीक्षण के बाद दो पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र के पंचायत तंत्र में हड़कंप मच गया है।

जनसमस्या निवारण शिविर के बाद किया औचक निरीक्षण
जानकारी के अनुसार मुकडेगा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर के बाद सीईओ अभिजीत पठारे ने आसपास की पंचायतों का अचानक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान वैस्कीमुड़ा और चिराईखार ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की स्थिति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
कागजों में आवास निर्माण की प्रगति बेहतर बताई जा रही थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दी। कई हितग्राहियों को राशि मिलने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ था।
131 स्वीकृत आवासों में सिर्फ 2 ही पूरे
जिला पंचायत द्वारा जारी नोटिस के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025–26 में ग्राम पंचायत वैस्कीमुड़ा में कुल 131 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 128 हितग्राहियों को पहली किश्त की राशि भी जारी कर दी गई थी।
लेकिन निरीक्षण के दौरान सामने आया कि:
केवल 2 आवास ही पूरी तरह बनकर तैयार हुए हैं।
38 आवास केवल प्लिंथ लेवल तक ही पहुंच पाए हैं।

जबकि 82 आवासों का निर्माण कार्य अभी तक शुरू ही नहीं हुआ।
यह स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि अधिकांश हितग्राहियों के खातों में राशि जारी होने के बावजूद आवास निर्माण जमीन पर नजर नहीं आ रहा।
सचिवों को कारण बताओ नोटिस
जिला पंचायत कार्यालय द्वारा जारी पत्र में ग्राम पंचायत वैस्कीमुड़ा के सचिव अशोक कुमार पटेल और ग्राम पंचायत चिराईखार के सचिव श्यामलाल सिदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान दोनों सचिवों ने उच्च अधिकारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया तथा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती। इस आधार पर उन्हें पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 3 (1) के तहत प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है।

तीन दिन में जवाब देने के निर्देश
प्रशासन ने दोनों सचिवों को तीन दिनों के भीतर सप्रमाण लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अन्य पंचायतों की भी हो सकती है जांच
सीईओ की इस सख्त कार्रवाई के बाद लैलूंगा क्षेत्र के पंचायत तंत्र में खलबली मच गई है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी प्रगति को लेकर अब अन्य पंचायतों की भी जांच की तैयारी की जा रही है।
उठ रहे कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल भी खड़े कर दिए हैं। जब हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए राशि जारी कर दी गई थी, तो फिर निर्माण कार्य आखिर क्यों शुरू नहीं हुआ? क्या इसकी जिम्मेदारी केवल पंचायत सचिवों तक सीमित है, या फिर व्यवस्था की अन्य कड़ियों में भी कहीं गंभीर गड़बड़ी छिपी हुई है?
अब प्रशासन की संभावित जांच के बाद ही इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आ पाएंगे। फिलहाल जिला प्रशासन की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई तय है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
