
ड्यूटी से ‘तलाक’ और सरकारी जमीन से ‘निकाह’: शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में, प्रधान आरक्षक को निर्माण रोकने का आदेश
अम्बिकापुर/सरगुजा | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी जमीन की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि पुलिस विभाग में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर वहां निर्माण कार्य शुरू कर दिया। शिकायत सामने आने के बाद अब प्रशासन सक्रिय हो गया है और निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में संबंधित प्रधान आरक्षक को नोटिस देकर निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले ने पूरे सरगुजा संभाग में चर्चा का विषय बना दिया है।
तबादले के बाद भी ड्यूटी से दूरी
मिली जानकारी के अनुसार प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती का तबादला हाल ही में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला में किया गया था। हालांकि आरोप है कि तबादले के बावजूद वे कथित रूप से सूरजपुर पुलिस लाइन में अटैच रहे।

सूत्रों के मुताबिक पिछले करीब एक महीने से वे नियमित ड्यूटी से भी अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। विभागीय स्तर पर उनके वेतन रोकने की चर्चा भी सामने आ रही है। इसी बीच सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत सामने आने से मामला और ज्यादा गंभीर हो गया।
अजीरमा में सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
मामले की शिकायत स्थानीय नागरिक जितेन्द्र कुमार जायसवाल ने राजस्व विभाग में की। शिकायत के अनुसार पटवारी हल्का नंबर-56 के अंतर्गत ग्राम अजीरमा में स्थित खसरा नंबर 74/1 शासकीय भूमि है, जिसका कुल रकबा लगभग 2.480 हेक्टेयर बताया गया है।

आरोप है कि इस भूमि के लगभग 0.700 हेक्टेयर हिस्से पर प्रधान आरक्षक द्वारा कब्जा कर विभिन्न गतिविधियां की जा रही थीं, जिनमें—
शेड का निर्माण
बाउंड्री (प्रिकार) बनाना
खेत तैयार कर मक्का की फसल बोना
जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी उस गांव के मूल निवासी नहीं हैं, इसके बावजूद सरकारी भूमि का उपयोग निजी संपत्ति की तरह किया जा रहा है।

प्रशासन का सख्त रुख, निर्माण रोकने का आदेश
शिकायत के बाद मामले की जांच राजस्व अमले द्वारा की गई। राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर अम्बिकापुर के अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालय (अम्बिकापुर-02) ने 6 मार्च 2026 को आदेश जारी किया।
आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि—
शासकीय भूमि पर चल रहा निर्माण कार्य तत्काल बंद किया जाए
संबंधित व्यक्ति 9 मार्च 2026 को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखे
आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं
अनुपस्थित रहने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी
पुलिस और राजस्व अधिकारियों को भी निर्देश
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार—
गांधीनगर थाना प्रभारी को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है
राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी को मौके पर निर्माण कार्य रुकवाने के निर्देश दिए गए हैं
नोटिस की विधिवत तामील कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है
कानून बनाम वर्दी
सामान्यतः सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में छत्तीसगढ़ भू‑राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस प्रावधान के तहत अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

लेकिन जब ऐसे आरोप किसी वर्दीधारी कर्मचारी पर लगते हैं, तो मामला और अधिक संवेदनशील हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कानून लागू करने वाले ही सरकारी जमीन पर कब्जा करने लगें, तो आम नागरिकों में कानून के प्रति भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
अब प्रशासन की परीक्षा
यह मामला अब केवल जमीन के अतिक्रमण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। लोगों की निगाहें अब प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
क्या वास्तव में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया जाएगा?
क्या संबंधित पुलिसकर्मी पर विभागीय कार्रवाई भी होगी?
या फिर मामला सिर्फ कागजों और नोटिसों तक ही सीमित रह जाएगा?
फिलहाल पूरे सरगुजा संभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
