
राजस्थान में भीषण सड़क हादसा: एक ही परिवार की सात महिलाओं की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम
एक साथ उठीं सात अर्थियां, एनएच-52 की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
फतेहपुर शेखावाटी (राजस्थान), 16 जनवरी 2026।
राजस्थान के फतेहपुर शेखावाटी क्षेत्र में शुक्रवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया।
राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (एनएच-52) पर हरसावा गांव के पास तेज रफ्तार कार की पिकअप और फिर ट्रक से हुई टक्कर में एक ही परिवार की सात महिलाओं की मौत हो गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कार पूरी तरह पिचक गई और मौके पर चीख-पुकार मच गई।
इस हादसे में सास, पांच बहुएं और बेटी ने अपनी जान गंवा दी। गांव में जब एक साथ सात अर्थियां उठीं, तो हर आंख नम हो गई और पूरा इलाका शोक में डूब गया।
अंतिम संस्कार से लौटते समय छिन गईं सात जिंदगियां
जानकारी के अनुसार, फतेहपुर सदर थाना क्षेत्र के रघुनाथपुरा गांव निवासी यह परिवार हाल ही में लक्ष्मणगढ़ गया था। परिवार की बुजुर्ग महिला मोहिनी देवी (80) की ननद, लक्ष्मणगढ़ निवासी कैलाश देवी के निधन के बाद सभी परिजन उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे।
शाम करीब चार बजे परिवार चार गाड़ियों में सवार होकर वापस गांव लौट रहा था। तीन वाहनों में पुरुष सवार थे, जबकि एक कार में परिवार की महिलाएं और चालक मौजूद थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा बन जाएगी।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हरसावा गांव के पास कार चालक ने ओवरटेक करने का प्रयास किया। तेज रफ्तार के कारण वाहन का संतुलन बिगड़ गया और कार पहले एक पिकअप से टकराई। इसके बाद वह अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे ट्रक में जा घुसी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और अंदर बैठी महिलाएं बुरी तरह फंस गईं। हादसे की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और हाईवे से गुजर रहे वाहन चालक मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक अधिकांश महिलाओं की मौत हो चुकी थी।
हादसे में जान गंवाने वाली महिलाएं
इस दर्दनाक दुर्घटना में जिन सात महिलाओं की मौत हुई, उनके नाम इस प्रकार हैं—
मोहिनी देवी (80) – सास
चंदा देवी (55) – बहू
तुलसी देवी (45) – बहू
बरखा देवी (35) – बहू (जयपुर ले जाते समय रास्ते में मौत)
आशा देवी (60) – बहू
संतोष देवी (45) – बहू
इंदिरा (60) – बेटी
हादसे में सोनू (35) और कार चालक वसीम (25) गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
चेतावनी के बावजूद तेज रफ्तार पड़ी भारी
परिजनों ने बताया कि लक्ष्मणगढ़ से रवाना होने से पहले ही चालक वसीम को कार धीमी गति से चलाने की हिदायत दी गई थी। परिवार पहले से ही शोक में डूबा हुआ था, लेकिन ओवरटेक करने के प्रयास में चालक ने रफ्तार बढ़ा दी। यही लापरवाही सात महिलाओं की जान पर भारी पड़ गई।
गांव में छाया सन्नाटा, नहीं जले चूल्हे
जैसे ही हादसे की खबर रघुनाथपुरा गांव पहुंची, पूरा गांव शोक में डूब गया। घर-घर सन्नाटा पसर गया और रात को किसी के घर चूल्हा तक नहीं जला।
मोहिनी देवी के पति का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार की महिलाएं ही घर की रीढ़ थीं।
संतोष देवी के पति सब्जी की दुकान चलाते हैं और उनके तीन बच्चे हैं।
तुलसी देवी के पति विदेश में मजदूरी करते हैं और छुट्टी पर गांव आए हुए थे।
आशा देवी के पति गैस एजेंसी में कार्यरत हैं।
एक झटके में परिवार की महिलाओं का यूं चले जाना पूरे गांव के लिए असहनीय सदमा बन गया।
प्रशासन और पुलिस मौके पर
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। फतेहपुर सदर थाना के सीआई सुरेंद्र तम देगड़ा ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। सभी शवों को धानुका अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया।
घायलों की स्थिति जानने के लिए कलेक्टर मुकुल शर्मा एसके अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। विधायक हाकम अली, भाजपा नेता श्रवण चौधरी, एडीएम रतनलाल स्वामी, एएसपी डॉ. तेजपाल सिंह, पालिका अध्यक्ष मुश्ताक नजमी सहित कई जनप्रतिनिधि भी अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंचे।
मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने जताया शोक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि फतेहपुर शेखावाटी में हुआ यह सड़क हादसा अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिवार को संबल देने की कामना की।
एनएच-52 की सुरक्षा पर फिर सवाल
गौरतलब है कि एनएच-52 पर इससे पहले भी कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। दो साल पहले संक्रांति के दिन ही नरोदड़ा बस स्टैंड के पास एक अनियंत्रित कार डिवाइडर से टकराकर दूसरी ओर से आ रही बोलेरो से भिड़ गई थी, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी।
लगातार हो रहे हादसे एनएच-52 पर तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग और सड़क सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाईवे पर सख्त निगरानी, स्पीड कंट्रोल और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है।
यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक कड़वा सबक है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
