
तिल्दा-नेवरा की सरकारी शराब दुकानों में खुलेआम ओवररेट वसूली, आबकारी विभाग मौन
तिल्दा-नेवरा।
तिल्दा-नेवरा क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों में इन दिनों खुलेआम ओवररेट वसूली का मामला लगातार सामने आ रहा है। तय सरकारी मूल्य होने के बावजूद उपभोक्ताओं से प्रति पाव 10 रुपये और दो पाव पर 20 रुपये तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। इस मनमानी से आम ग्राहकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और क्षेत्र में रोष व्याप्त है।
स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि सरकारी दरों को खुलेआम नजरअंदाज कर दुकानों के सेल्समेन मनमाने तरीके से अतिरिक्त पैसे मांग रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, जिस शराब की निर्धारित कीमत 80 रुपये है, उसके लिए 90 रुपये वसूले जा रहे हैं, वहीं 100 रुपये वाली शराब 110 रुपये में दी जा रही है। ग्राहक जब तय मूल्य की बात करते हैं तो उन्हें टालमटोल या बहस का सामना करना पड़ता है।
सरोरा मार्ग स्थित शराब दुकान पर हालात गंभीर
तिल्दा सासाहोली से सरोरा मार्ग पर स्थित सरकारी शराब दुकान में ओवररेट वसूली चरम पर बताई जा रही है। यहां आए दिन ग्राहकों और दुकान कर्मचारियों के बीच विवाद, झगड़े और कहासुनी की स्थिति बन रही है। कई बार मामूली रकम को लेकर बात इतनी बढ़ जाती है कि लड़ाई की नौबत तक आ जाती है।
जेब में अतिरिक्त पैसे न होने पर लौटना पड़ता है खाली हाथ
ग्राहकों का कहना है कि कई बार जेब में अतिरिक्त 10 से 20 रुपये न होने के कारण उन्हें बिना शराब खरीदे ही वापस लौटना पड़ता है। कुछ लोग मजबूरी में परिचितों से उधार लेकर अतिरिक्त रकम चुकाने को विवश होते हैं। सरकारी दुकान होने के बावजूद इस तरह की अवैध वसूली आम जनता के साथ अन्याय है।
आबकारी विभाग की चुप्पी पर सवाल
सबसे गंभीर सवाल यह है कि इन तमाम शिकायतों के बावजूद आबकारी विभाग मौन क्यों है? उपभोक्ताओं का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, फिर भी न तो निरीक्षण हो रहा है और न ही दोषी कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई की जा रही है। इससे साफ प्रतीत होता है कि या तो विभाग को जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों और उपभोक्ताओं ने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी दुकानों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, निर्धारित दरों की सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए और ओवररेट वसूली करने वाले कर्मचारियों पर सख्त एवं कड़े नियमों के तहत कार्रवाई हो।
यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में असंतोष और बढ़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
