धरमजयगढ़: मनरेगा में कथित अनियमितता का मामला, रोजगार सहायक पर खुद के नाम पर मजदूरी भुगतान कराने का आरोप

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धरमजयगढ़ | मनरेगा में कथित अनियमितता का मामला, रोजगार सहायक पर खुद के नाम से मजदूरी भुगतान कराने का आरोप


महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) जैसी गरीबों के लिए बनी महत्वाकांक्षी योजना में कथित तौर पर बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचीरा में पदस्थ रोजगार सहायक पर अपने ही नाम से मजदूरी भुगतान कराने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।


क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी और शिकायत आवेदन के अनुसार ग्राम पंचायत कंचीरा में पदस्थ रोजगार सहायक ललित यादव, पिता पीतांबर यादव पर आरोप है कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी की।


उक्त कार्य का विवरण इस प्रकार बताया गया है—
Construction of PMAY-G House for Individuals – PMAY-G (REG. NO. CH142620803 / 3313001110/IF/IAY/1980849)


शिकायतकर्ता का आरोप है कि रोजगार सहायक ने इस निर्माण कार्य में स्वयं को मजदूर दर्शाते हुए फर्जी मस्टर रोल तैयार कराया।


मस्टर रोल और भुगतान का विवरण
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि
मस्टर रोल क्रमांक: 10236
कार्य अवधि: 20 जून 2025 से 05 जुलाई 2025
कुल मानक दिवस: 16
भुगतान राशि: 4176 रूपये


यह राशि कथित तौर पर रोजगार सहायक ने स्वयं के नाम से आहरित कर ली। जबकि मनरेगा और पंचायत राज अधिनियम के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार कोई भी रोजगार सहायक स्वयं मनरेगा कार्य में मजदूरी नहीं कर सकता।


नियमों का उल्लंघन और गंभीर आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि रोजगार सहायक द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्वयं को हितग्राही एवं मजदूर दिखाना न केवल आर्थिक अनियमितता है, बल्कि यह शासकीय राशि के कथित गबन की श्रेणी में भी आता है। इससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।


कलेक्टर से की गई कार्रवाई की मांग
मामले को गंभीर बताते हुए आवेदक ने रायगढ़ कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर
निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच
दोषी पाए जाने पर कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई
तथा त्वरित निर्णय
की मांग की है।


प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मनरेगा जैसी योजना में सेंधमारी का बड़ा उदाहरण माना जाएगा। वहीं, प्रशासन की सख्त कार्रवाई न केवल दोषियों के लिए संदेश होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी कथित अनियमितताओं पर भी अंकुश लगेगा।


फिलहाल, पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोष किस स्तर तक बनता है।

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