मामा भांजा की आपराधिक तिकड़ी का आतंक: निर्भीक पत्रकारिता पर हमला,पत्रकार दम्पत्ति को जान से मारने की धमकी; ठोस सबूतों के बावजूद पुलिस की ढिलाई से बढ़े अपराधियों के हौसले

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मामा–भांजा की आपराधिक तिकड़ी का आतंक: निर्भीक पत्रकारिता पर हमला, पत्रकार दम्पत्ति को जान से मारने की धमकी; ठोस सबूतों के बावजूद पुलिस की ढिलाई से बढ़े अपराधियों के हौसले


बिलासपुर।
बिलासपुर जिले में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को दबाने की एक अत्यंत गंभीर, चिंताजनक और लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही घटना सामने आई है। कोयला साइडिंग, कोल वॉशरी और कोल डिपो से जुड़े कथित अवैध कारोबार पर तथ्यात्मक समाचार प्रकाशित करने से बौखलाए आपराधिक प्रवृत्ति के मामा–भांजा की तिकड़ी ने एक पत्रकार दम्पत्ति को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है।

आरोप है कि हत्या की साजिश रची गई, अवैध हथियारों का प्रदर्शन किया गया और सोशल मीडिया व प्रत्यक्ष रूप से आतंक फैलाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद पुलिस द्वारा गंभीर व गैर-जमानतीय धाराएं नहीं लगाए जाने से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

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कौन हैं पीड़ित पत्रकार?


जयरामनगर निवासी डी.पी. गोस्वामी, जो दैनिक नया इंडिया, न्यू इंडिया टाइम्स वेबसाइट एवं एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक पोर्टल के ब्यूरो चीफ हैं, तथा उनकी धर्मपत्नी दिव्या पुरी गोस्वामी (वरिष्ठ पत्रकार) ने थाना मस्तूरी में नामजद शिकायत दर्ज कराई है। दोनों पत्रकार लंबे समय से जनहित से जुड़े मुद्दों, विशेषकर कोयला कारोबार से प्रभावित ग्रामीणों, पर्यावरण और प्रशासनिक अनियमितताओं पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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कोयला कारोबार पर खबरें बनीं हमले की वजह


शिकायत के अनुसार, पत्रकार दम्पत्ति ने कोल वॉशरी, कोल साइडिंग, कोल डिपो, संबंधित कंपनियों, प्रभावशाली व्यक्तियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर तथ्यात्मक और संतुलित कवरेज किया था। इन खबरों में प्रभावित ग्रामीणों की आपत्तियों, पर्यावरणीय चिंताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाओं को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।

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इन्हीं समाचारों से आहत होकर कथित रूप से कोयला कारोबार से जुड़े तत्वों ने संजय पांडेय और उसके भांजों विकास तिवारी व अनुराग तिवारी (निवासी जयरामनगर, थाना मस्तूरी, जिला बिलासपुर) को पत्रकार दम्पत्ति के खिलाफ उकसाया और नुकसान पहुंचाने की सुपारी दिलवाई।


सोशल मीडिया से लेकर घर के सामने तक धमकियां
पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी लगातार सोशल मीडिया ग्रुप्स में अश्लील गाली-गलौच कर रहे हैं, अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और कई बार प्रत्यक्ष रूप से उनके घर के सामने आकर जान से मारने की धमकी दे चुके हैं।
आरोप है कि अवैध बंदूक और पिस्तौल दिखाकर डराया गया और यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि खबरें बंद नहीं की गईं, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

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‘बीजापुर के पत्रकार जैसा हाल करेंगे’—खुली धमकी
पत्रकार दम्पत्ति के अनुसार, दिवाली के दौरान 17 से 19 अक्टूबर 2025 के बीच आरोपियों ने उनके घर के सामने खड़े होकर खुलेआम धमकी दी—
“तुम्हारा हाल भी बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर जैसा करेंगे।”


इतना ही नहीं, 19 अक्टूबर 2025 की रात लगभग 9–10 बजे, संजय पांडेय की पटाखा दुकान के पास से साजिशन गुजरते हुए आरोपी घर के सामने रुके और पुनः धमकी देकर दहशत फैलाने की कोशिश की। इससे पहले भी कई बार असफल साजिशें रचने और रेकी करने के आरोप लगाए गए हैं।


एफआईआर दर्ज, लेकिन धाराएं बेहद हल्की


थाना मस्तूरी में दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं—
अपराध क्रमांक 415/2025 (दिनांक 26.06.2025)
अपराध क्रमांक 548/2025 (दिनांक 28.05.2025)
इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 79 और 35 लगाई गई है। पीड़ित पत्रकारों का कहना है कि जान से मारने की धमकी, हथियार दिखाना, आपराधिक साजिश और लगातार डराने जैसे गंभीर अपराधों के बावजूद गैर-जमानतीय धाराएं नहीं जोड़ी गईं, जिससे आरोपियों का मनोबल और बढ़ गया।


सबूत मौजूद, परिवार दहशत में।


गोस्वामी दम्पत्ति का कहना है कि उनके पास ऑडियो, वीडियो और अन्य दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं, जिन्हें जांच में आसानी से सत्यापित किया जा सकता है। लगातार मिल रही धमकियों के कारण पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है। आरोप यह भी है कि आरोपी दबाव बनाकर मामले में समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं।


आपराधिक इतिहास के बावजूद ढिलाई


बताया गया है कि संजय पांडेय और उसके दोनों भांजों के विरुद्ध न केवल इस प्रकरण में, बल्कि पूर्व में भी कई आपराधिक शिकायतें दर्ज हैं। अन्य पीड़ितों द्वारा 8 से 10 शिकायतें पहले से दर्ज कराई जा चुकी हैं। इसके बावजूद हर बार मामूली धाराएं लगाकर आरोपियों को राहत मिलती रही, जिससे वे लगातार श्रृंखलाबद्ध अपराध करते आ रहे हैं।
एसपी ने माना मामला गंभीर, फिर भी कार्रवाई सवालों के घेरे में


सूत्रों के अनुसार, बिलासपुर एसपी ने पत्रकार दम्पत्ति की शिकायत को बेहद गंभीर मानते हुए एसडीओपी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक प्रभावी और कठोर कानूनी कदम न उठाए जाने से पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


उच्चाधिकारियों से सुरक्षा और न्याय की मांग
पत्रकार दम्पत्ति डी.पी. गोस्वामी और दिव्या गोस्वामी ने छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री, डीजीपी, आईजी बिलासपुर एवं बिलासपुर एसपी को विस्तृत शिकायत सौंपकर—
आरोपियों पर गैर-जमानतीय धाराएं जोड़ने
त्वरित गिरफ्तारी
निष्पक्ष जांच
और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने
की मांग की है।


लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला


यह मामला केवल एक पत्रकार दम्पत्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ—पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। यदि समय रहते कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो यह भविष्य में सच लिखने वाले पत्रकारों के लिए एक खतरनाक नज़ीर बन सकता है।

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