
छत्तीसगढ़िया गौरव और अस्मिता पर दो दिवसीय महत्त्वपूर्ण बैठक संपन्न — अमित बघेल के समर्थन में सर्व समाज एकजुट
रायपुर से विशेष रिपोर्ट
राजधानी रायपुर में बीते दो दिनों तक चली “छत्तीसगढ़िया गौरव और अस्मिता” विषय पर आयोजित महत्त्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के विभिन्न समाजों, संगठनों और समुदायों के प्रतिनिधि एक मंच पर नजर आए। इस बैठक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की परंपरा, संस्कृति, भाषा और अस्मिता की रक्षा के साथ-साथ प्रदेश के स्वाभिमान से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता दिखाना था।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु रहा—अमित बघेल के खिलाफ दर्ज एफआईआर, जिसे सभी समाज प्रमुखों ने “दुर्भावनापूर्ण और उद्देश्यपूर्ण” बताया। प्रतिनिधियों का कहना था कि अमित बघेल ने केवल प्रशासन से सवाल पूछा था, परंतु उनके वक्तव्य को तोड़-मरोड़कर विवाद का रूप दे दिया गया।
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🟢 सर्वसम्मति से पारित पाँच महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव
बैठक के दौरान विभिन्न समाजों के प्रमुखों ने सर्वसम्मति से पाँच अहम प्रस्ताव पारित किए—
1. अमित बघेल के खिलाफ दर्ज एफआईआर की निंदा करते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की गई।
2. एफआईआर को रद्द कराने के लिए सर्व समाज के प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति और राज्यपाल से मुलाकात का निर्णय लिया गया।
3. छत्तीसगढ़ी व्यापारियों से ही लेन-देन करने का संकल्प लिया गया, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
4. राजभाषा छत्तीसगढ़ी में ही समाज के कार्य करने का निर्णय सर्वसम्मति से पारित किया गया।
5. छत्तीसगढ़िया पुरखों के सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखने का दृढ़ संकल्प लिया गया।
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🔶 “छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान महारैली” का ऐलान
बैठक में यह भी तय किया गया कि राजधानी रायपुर में जल्द ही ‘छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान महारैली’ निकाली जाएगी। इस महारैली का उद्देश्य होगा—छत्तीसगढ़िया संस्कृति, परंपरा और अस्मिता की रक्षा, तथा प्रदेश के मूल निवासियों के अधिकारों के लिए एक सशक्त संदेश देना।
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🔴 “पुरखों के अपमान” पर तीखे सवाल
बैठक में उपस्थित समाज प्रतिनिधियों ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़िया पुरखों के अपमान से जुड़े मामलों में कार्रवाई ढीली और पक्षपातपूर्ण रही है। उदाहरण के तौर पर—
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की प्रतिमा खंडित करने वालों की गिरफ्तारी आज तक नहीं हुई।
बसना में वीर नारायण सिंह की प्रतिमा को कचरा वाहन में फेंकने पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
संत गुरु घासीदास के छायाचित्र के अपमान पर कार्यवाही नदारद रही।
डॉ. खुबचंद बघेल की प्रतिमा पर कालिख पोतने वाले अब भी आज़ाद घूम रहे हैं।
समाज प्रमुखों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि —
> “छत्तीसगढ़िया पुरखों का अपमान राजद्रोह की श्रेणी में आना चाहिए, और ऐसे अपराधियों पर कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।”
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⚖️ शासन के लिए स्पष्ट संदेश
बैठक में वक्ताओं ने यह भी कहा कि प्रदेश में शांति, सद्भाव और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार को एकतरफा कार्रवाई बंद करनी होगी। राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर छत्तीसगढ़ियावाद और स्थानीय स्वाभिमान को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई।
बैठक के समापन पर सभी समाज प्रमुखों ने एक स्वर में कहा—
> “छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। यह भूमि हमारे पुरखों की विरासत है, और उसकी रक्षा हर छत्तीसगढ़िया की जिम्मेदारी है।”

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
