देव उठनी एकादशी, छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस और बाबा खाटू श्याम जन्मोत्सव का संगम ,पुरे प्रदेश में उत्सव और उल्लास का माहौल

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🌿 देवउठनी एकादशी, छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस और बाबा खाटू श्याम जन्मोत्सव का संगम — पूरे प्रदेश में उत्सव और उल्लास का माहौल 🌿

रायपुर, १ नवम्बर २०२५ (संवाददाता):
आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए इतिहास और आस्था, दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है। एक ओर प्रदेश अपना २५वां स्थापना दिवस मना रहा है, वहीं दूसरी ओर देवउठनी एकादशी और बाबा खाटू श्याम जी जन्मोत्सव का पावन अवसर होने से पूरे प्रदेश में भक्ति और हर्षोल्लास का वातावरण व्याप्त है।

🪔 देवउठनी एकादशी — शुभ कार्यों की शुरुआत

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागृत होते हैं। इसी के साथ विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

राजधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, कवर्धा और जशपुर समेत सभी जिलों के मंदिरों में आज सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने तुलसी विवाह का आयोजन किया, जिसमें तुलसी माता को चुनरी ओढ़ा ,नई साड़ी, फल व मिठाई ,गन्ने अर्पित कर पूजा की गई। बच्चों ने पटाखे फोड़कर इस पर्व की खुशी में रंग भर दिए।



> “देवउठनी एकादशी से भगवान विष्णु पुनः लोक कल्याण के कार्यों में प्रवृत्त होते हैं। इस दिन किया गया पूजा-पाठ और दान सौगुना फल देता है।”
भगवान विष्णु और देवी तुलसी का विवाह
भगवान विष्णु ने वृंदा के त्याग और सच्चे प्रेम का सम्मान करते हुए उन्हें वरदान दिया कि वे तुलसी के रूप में सदैव पूजी जाएंगी और बिना तुलसी के उनकी कोई भी पूजा पूर्ण नहीं होगी। अपनी इस प्रतिज्ञा को निभाने के लिए भगवान विष्णु ने शालिग्राम स्वरूप में तुलसी से विवाह करने का संकल्प लिया।



तुलसी विवाह एवं देवउठनी एकादशी
देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और तभी से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। तुलसी विवाह में, तुलसी के पौधे का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के साथ कराया जाता है, जो बेहद शुभ माना जाता है।
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह
देवउठनी एकादशी: इसे ‘देव प्रबोधिनी एकादशी’ भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु नींद से जागते हैं और सारे मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, आदि की शुरुआत होती है।
तुलसी विवाह: पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर बन गए थे। बाद में, जब वृंदा ने अपना बलिदान दिया, तो उनके भस्म हुए स्थान पर तुलसी का पौधा उगा। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे तुलसी के रूप में उनके साथ रहेंगी। इसी कारण, देवउठनी एकादशी पर तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराया जाता है।
तुलसी विवाह के लाभ
विवाह और धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
यह विवाह के मौसम की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है।
घर में तुलसी के पौधे के रहने से यम के दूत भी प्रवेश नहीं कर सकते।


पूजन में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें।
यदि किसी कारणवश एकादशी को विवाह संभव न हो, तो कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी दिन यह विवाह कर सकते हैं।






🎉 छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस — विकास और गौरव का उत्सव

१ नवम्बर २००० को मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। आज प्रदेश अपनी २५वीं वर्षगांठ मना रहा है। राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ करते हुए प्रदेशवासियों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा —

> “छत्तीसगढ़ की पहचान अब देशभर में एक उभरते हुए, आत्मनिर्भर और जनकल्याणकारी राज्य के रूप में हो रही है। यह हमारी संस्कृति, मेहनतकश जनता और नैसर्गिक संपदा का प्रतिफल है।”



साथ ही प्रदेश के सभी जिलों, ब्लॉकों और ग्राम पंचायतों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों का आयोजन हुआ। सरकारी भवनों और चौक-चौराहों को रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया।




🙏 बाबा खाटू श्याम जी जन्मोत्सव — श्रद्धा और सेवा का पर्व

आज ही के दिन बाबा खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव भी मनाया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में भव्य भजन संध्या, शोभा यात्राएं, और सज्जित झांकियों का आयोजन किया गया। रायपुर स्थित खाटू श्याम मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।

भक्तों ने “श्याम तेरी भक्ति अमर रहे” और “हारे के सहारे श्याम हमारे” जैसे भजनों पर झूमकर बाबा का जन्मोत्सव मनाया। मंदिर समितियों द्वारा प्रसाद वितरण, भंडारा और सेवा शिविरों का आयोजन किया गया।




🌺 तीन पर्व — एक दिन, एक उत्सव

आज का दिन छत्तीसगढ़ में संवेदनाओं, श्रद्धा और राज्य गौरव का अद्भुत संगम लेकर आया है। जहाँ एक ओर धर्म और परंपरा की ज्योति प्रज्वलित है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की विकास यात्रा का उत्सव भी मनाया जा रहा है।

सचमुच, यह दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बन गया है।




📰 (संवाददाता: तिल्दा टाइम्स न्यूज़ टीम,तिल्दा-नेवरा,  रायपुर छत्तीसगढ़ )

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