
साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट का संचालन करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार – पुलिस की बड़ी कार्रवाई
बिलासपुर/मुंगेली। साइबर अपराध के मामलों पर लगातार शिकंजा कस रही पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। म्यूल अकाउंट (Mule Account) के माध्यम से साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां पूर्व में पकड़े गए एक आरोपी से पूछताछ, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और तकनीकी जांच के आधार पर की गई हैं।
📌 क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग अपराधी अवैध रूप से ठगी के पैसों को इधर-उधर करने के लिए करते हैं। साइबर ठग अक्सर भोले-भाले लोगों को लालच देकर या पैसे का ऑफर देकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवाते हैं, जिनका उपयोग बाद में धोखाधड़ी में किया जाता है।
—
🔍 पुलिस जांच की प्रमुख बातें:
गिरफ्तार तीनों आरोपी म्यूल अकाउंट का संचालन कर रहे थे।
उनके बैंक खातों में साइबर ठगी से प्राप्त की गई रकम ट्रांसफर की जा रही थी।
इन खातों से रकम को आगे निकाल कर या ट्रांसफर कर साइबर ठगों की मदद की जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी इस ठगी की रकम का उपभोग भी कर रहे थे।
—
👮♂️ गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान:
1. ईश्वरी प्रसाद पटेल उर्फ विवेक पटेल
उम्र: 29 वर्ष
निवासी: ग्राम मोडेहे, थाना तखतपुर, जिला बिलासपुर
2. रविशंकर कश्यप
उम्र: 21 वर्ष
निवासी: ग्राम ठरकपुर, पोस्ट कोतरी, थाना लालपुर, जिला मुंगेली
3. आयुष बंजारे
उम्र: 21 वर्ष
निवासी: ग्राम मुढे, पोस्ट बेलसरा, थाना तखतपुर, जिला बिलासपुर
—
🛑 साइबर ठगों का जाल और म्यूल अकाउंट की भूमिका:
साइबर ठग पहले आम नागरिकों से बैंक खाते, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों की जानकारी लेते हैं। फिर उन्हीं खातों का इस्तेमाल कर बड़ी रकम की ट्रांजेक्शन की जाती है। ताकि असली अपराधी तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। ये खाते “म्यूल अकाउंट” कहलाते हैं। इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में ये गिरफ्तार युवक मदद कर रहे थे।
—
🚔 पुलिस का बयान:
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में पकड़े गए एक आरोपी से पूछताछ के दौरान इस नेटवर्क की जानकारी सामने आई। जांच में तकनीकी सबूत जैसे बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स आदि के आधार पर इन तीनों की संलिप्तता पाई गई। इसके बाद एक सुनियोजित कार्रवाई कर इन्हें हिरासत में लिया गया।
—
⚖️ आगे की कार्रवाई:
तीनों आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन आरोपियों के जरिए कितने अन्य खातों का उपयोग साइबर ठगी में किया गया।
पूरे नेटवर्क के पीछे किस गिरोह का हाथ है, इसकी गहराई से जांच की जा रही है।
—
🧠 सावधानी ही सुरक्षा है:
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी को भी अपने बैंक खाता, एटीएम, पासबुक या आधार कार्ड की जानकारी न दें। किसी लालच में आकर खाता न खुलवाएं और न ही किसी और को अपने दस्तावेज दें। ऐसे मामलों में व्यक्ति भी अपराध का भागीदार बन सकता है।
—
इस कार्रवाई से एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि साइबर ठगी के मामलों में स्थानीय स्तर पर भी लोग शामिल हो रहे हैं। पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच से ऐसे मामलों में तेजी से खुलासे हो रहे हैं। आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि वे इन ठगों के जाल में न फंसे।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
