
तिल्दा-नेवरा नगरपालिका मे गांधी वार्ड के सार्वजनिक शौचालय महीनों से बंद, ‘स्वच्छ भारत’ अभियान को लग रहा पलीता
स्थान: तिल्दा-नेवरा, छत्तीसगढ़ | रिपोर्टर: अनिल कुमार भट्ट

स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत देश भर में स्वच्छता को लेकर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन तिल्दा-नेवरा नगरपालिका क्षेत्र के गांधी वार्ड क्रमांक 09 में यह अभियान सिर्फ नारों और बोर्डों तक ही सीमित नजर आता है। यहां के दोनों सार्वजनिक शौचालय या तो वर्षों से अधूरे पड़े हैं या फिर महीनों से ताले में बंद हैं। नतीजतन, वार्डवासियों को आज भी खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
दो शौचालय, दोनों उपेक्षा के शिकार
1. कोटा रोड, पीतांबरा फूड के पास स्थित शौचालय
इस शौचालय का निर्माण लगभग 11 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था, लेकिन ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया। तब से यह निर्माणाधीन भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में खड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य अधूरा रहने के बावजूद न तो नगरपालिका और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने अब तक इस पर कोई ध्यान दिया है। यह ढांचा अब नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है।
2. गांधी वार्ड का चालू लेकिन बंद शौचालय
गांधी वार्ड क्रमांक 09 में स्थित एक और शौचालय जो पहले चालू स्थिति में था, पिछले कई महीनों से ताले में बंद है। वार्डवासियों ने बताया कि इस शौचालय को साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में बंद कर दिया गया। लोग मजबूरी में आसपास के खेतों और सुनसान जगहों पर शौच जाने को विवश हैं, जिससे न केवल उनकी गरिमा को ठेस पहुंच रही है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी खतरा बढ़ गया है।

शिकायतें बेअसर, समाधान नदारद
स्थानीय नागरिकों ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है:
नगरपालिका कार्यालय में मौखिक और लिखित शिकायतें
वार्ड पार्षद से व्यक्तिगत रूप से संपर्क
जन निवारण पोर्टल (CM Helpline 1100) पर भी शिकायत दर्ज
परंतु, परिणाम ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। न कोई निरीक्षण, न कोई समाधान — सिर्फ आश्वासन और फाइलों में दबती शिकायतें।

क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक?
हर साल स्वच्छता रैंकिंग की बात होती है, लेकिन हम यहां बुनियादी सुविधा के लिए भी तरस रहे हैं। अगर शौचालय बंद ही रहने हैं, तो निर्माण और प्रचार किसलिए?
महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी अधिक शर्मनाक और असुरक्षित है। रात में बाहर जाना खतरे से खाली नहीं होता। लेकिन हमारे प्रतिनिधि सिर्फ चुनावों के समय दिखाई देते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों की योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि सालों से अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स की सुध तक नहीं ली जाती।
गांधी वार्ड में शौचालयों की यह दुर्दशा केवल एक वार्ड की नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का प्रतीक है। स्वच्छ भारत अभियान की सफलता सिर्फ आंकड़ों से नहीं, जमीनी बदलाव से तय होगी — और जब तक ऐसी समस्याओं पर गंभीरता से काम नहीं होता, तब तक ‘स्वच्छ भारत’ सिर्फ एक सपना ही बना रहेगा।
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लेखक: अनिल कुमार भट्ट
समाचार स्रोत: तिल्दा टाइम्स CG न्यूज

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
