एग्रीस्टेक पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी से पंजीयन  प्रक्रिया बाधित, ,किसान परेसान

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पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी से धान बेचने की राह आसान नहीं

📍 तिल्दा नेवरा | विशेष संवाददाता

शहरी क्षेत्रों के किसानों के लिए इस बार धान बेचने की राह आसान नहीं दिख रही है। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित एग्रीस्टेक पोर्टल (agristech.gov.in) में पंजीयन प्रक्रिया बाधित होने के कारण किसान बेहद परेशान हैं।

पोर्टल या तो खुल ही नहीं रहा है, या पंजीयन के अंतिम चरण में तकनीकी त्रुटियाँ आ रही हैं। ऐसे में किसान जनपद कार्यालयों और सेवा केंद्रों के लगातार चक्कर काट रहे हैं, पर समाधान कहीं से नहीं मिल रहा।




❗ बड़ा सवाल: क्या बिना पंजीयन के किसान धान बेच सकते हैं?

राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पंजीयन अनिवार्य है।
बिना पंजीयन के कोई भी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी धान की उपज नहीं बेच सकता।

इसका मतलब साफ है —
यदि किसी किसान का पंजीयन नहीं हुआ, तो वह इस खरीदी सीजन में अपनी उपज सरकार को नहीं बेच पाएगा।




🔍 कहाँ हो रही है गड़बड़ी? किसकी जिम्मेदारी?

किसान तो तैयार हैं, लेकिन सिस्टम ही उनका साथ नहीं दे रहा।
आइए समझते हैं इस समस्या की जड़ें:

👉 1. पोर्टल की तकनीकी विफलता:

agristech.gov.in वेबसाइट या तो खुल नहीं रही है या बार-बार क्रैश हो रही है।

OTP न आना, सर्वर टाइम आउट, फॉर्म सबमिट न होना जैसी समस्याएँ आम हैं।


👉 2. शहरी सेवा केंद्रों में संसाधनों की कमी:

कई लोकसेवा केंद्रों और CSC (Common Service Centers) में न तो पर्याप्त कंप्यूटर हैं, न ही प्रशिक्षित स्टाफ।

भीड़ अधिक, सुविधा कम — किसान दिनभर लाइन में खड़े रहते हैं।


👉 3. कृषि विभाग की निष्क्रियता:

न तो उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है और न ही हेल्पलाइन नंबर काम कर रहे हैं।

नजदीकी स्तर पर किसी तरह की वर्कशॉप या रजिस्ट्रेशन कैंप भी नहीं लगाए गए हैं।





🎙 किसानों की पीड़ा — “धान बिकेगा या नहीं?”

> “हम रोज़ जनपद कार्यालय और सेवा केंद्र के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन पोर्टल खुल ही नहीं रहा। अब तो चिंता हो रही है कि धान बिकेगा या नहीं।”
— रामलाल साहू, किसान, तिल्दा नेवरा



> “धान तैयार है, लेकिन बेचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा। बारिश में पड़े-पड़े सड़ जाएगा।”
— गंगाराम वर्मा, वार्ड 13 निवासी






✅ क्या हो सकते हैं त्वरित समाधान?

इस संकट को देखते हुए, कुछ समाधान तुरंत लागू किए जा सकते हैं:

✅ 1. पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए

ताकि किसान बिना दबाव के पंजीयन पूरा कर सकें।


✅ 2. पोर्टल की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए

IT टीम को तत्काल एक्शन में लाया जाए।


✅ 3. वार्ड और पंचायत स्तर पर कैंप आयोजित किए जाएं

मोबाइल यूनिट या अस्थायी सेंटर से फील्ड में जाकर रजिस्ट्रेशन किया जाए।


✅ 4. ऑफलाइन पंजीयन की वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए

जब तक पोर्टल सामान्य न हो, तब तक कागज़ी फार्म से पंजीयन की अनुमति दी जाए।





📢 किसान संगठनों की चेतावनी:

कई किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार को आगाह किया है कि:

> “जब तक पोर्टल सामान्य स्थिति में न आ जाए, तब तक किसानों को खरीदी से वंचित न किया जाए।







📌 निष्कर्ष:

यह स्पष्ट है कि पंजीयन न हो पाने की स्थिति किसानों की गलती नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है।

किसानों का काम खेती करना है, तकनीकी गड़बड़ियों से जूझना नहीं।
यदि सरकार वास्तव में किसानों की हितैषी है, तो उसे तुरंत हस्तक्षेप कर इस संकट का समाधान निकालना चाहिए।

अन्यथा यह मुद्दा सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक न्याय और अधिकार का सवाल बन जाएगा — जो आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन भी बन सकता है।




✍️ रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, तिल्दा नेवरा
🗓️ प्रकाशन तिथि: 07 सितंबर 2025

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