सूरजपुर जिले में सात दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण संपन्न — कृषकों में बढ़ा आत्मविश्वास, अतिरिक्त आय का खुला नया मार्ग

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सूरजपुर जिले में सात दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण संपन्न — कृषकों में बढ़ा आत्मविश्वास, अतिरिक्त आय का खुला नया मार्ग

सूरजपुर। कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के निर्देशन में तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल एवं विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. एस.एस. टुटेजा के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केन्द्र, सरगुजा परिसर में नेशनल बीकीपिंग एंड हनी मिशन (NBHM) के अंतर्गत मधुमक्खी पालन विषय पर सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का सफल आयोजन 03 नवम्बर से 09 नवम्बर 2025 तक किया गया।

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते ऑनलाइन माध्यम से जुड़ीं और प्रतिभागी कृषक बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “मधुमक्खी पालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। इससे न केवल अतिरिक्त आय का सृजन संभव है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होता है।” उन्होंने किसानों को प्रेरित किया कि वे इस व्यवसाय को आत्मनिर्भरता के साधन के रूप में अपनाएं।

कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र, सरगुजा के प्रभारी डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि सरगुजा संभाग में मधुमक्खी पालन व्यवसाय की अपार संभावनाएँ हैं। इसी उद्देश्य से सूरजपुर जिले के 25 चयनित प्रतिभागियों को सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रायोगिक अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि प्रतिभागियों में मधुमक्खी पालन को लेकर आत्मविश्वास और व्यावहारिक कौशल विकसित हो सके।

सहायक संचालक उद्यानिकी श्री जे.एस. मरावी ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि इच्छुक कृषकों को मधुमक्खी पालन प्रारंभ करने हेतु आवश्यक सहायता और मधुमक्खी पेटी उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं कृषि महाविद्यालय प्रतापपुर के अधिष्ठाता डॉ. पी.एस. राठिया ने आलू उत्पादन तकनीक के साथ-साथ मधुमक्खी पालन के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की।

सहायक संचालक (अनुसंधान) डॉ. के.एल. पैंकरा ने कहा कि “मधुमक्खी पालन समन्वित कृषि प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसे अपनाकर किसान बिना अधिक लागत के लाभ कमा सकते हैं। प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रतिभागी वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन कर बेहतर मुनाफा कमा सकेंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि सरगुजा संभाग का भौगोलिक व वनाच्छादित क्षेत्र इस व्यवसाय के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

डॉ. पैंकरा ने यह भी रेखांकित किया कि मधुमक्खी पालन से न केवल शहद, मोम एवं अन्य उत्पाद प्राप्त होते हैं, बल्कि फसलों के परागण में वृद्धि के कारण उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि भी देखी जाती है। उन्होंने हनी मिशन के अंतर्गत अधिक से अधिक किसानों को इस व्यवसाय से जोड़ने का आह्वान किया।

समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने अपने सात दिवसीय प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए और बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें मधुमक्खी पालन की आधुनिक तकनीकों, छत्तों के प्रबंधन, रोग नियंत्रण, शहद निष्कर्षण एवं विपणन के तरीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई है। प्रतिभागियों ने कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं प्रशिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन केंद्र के वैज्ञानिकों ने किया तथा प्रशिक्षण की सफलता में समस्त स्टाफ एवं विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सात दिवसीय इस प्रशिक्षण के माध्यम से सरगुजा संभाग में मधुमक्खी पालन को एक नए रोजगारोन्मुख स्वरूप में विकसित करने की दिशा में यह पहल एक सार्थक कदम सिद्ध हुई है।

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