

शिक्षक दिवस को सासाहोली के विद्यालय में बच्चों ने भावपूर्ण अंदाज़ मे मनाया

सासाहोली, 06 सितम्बर 2025:
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सासाहोली में आज दिनांक 06 सितम्बर 2025 को शिक्षक दिवस बड़े ही सौहार्द और श्रद्धा के साथ मनाया गया। चूँकि 5 सितम्बर को इद-उल-मिलादुन्नबी के कारण विद्यालय में अवकाश घोषित था, अतः विद्यालय परिवार द्वारा शिक्षक दिवस का आयोजन आज किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः कालीन सभा में सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों का तिलक कर, पुष्प अर्पित करते हुए उनका अभिनंदन किया। बच्चों ने पारंपरिक रीति से अपने गुरुओं की पूजा-अर्चना की और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। शिक्षक दिवस के इस अवसर पर विद्यालय परिसर एक पवित्र गुरुकुल की अनुभूति करवा रहा था।

छात्रों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जिसमें देशभक्ति गीत, नाटक, कविताएं और शिक्षकों के योगदान पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। इन प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को सुंदरता से अभिव्यक्त किया।
विद्यालय के प्राचार्य ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, बल्कि वे समाज को दिशा देने वाले पथप्रदर्शक भी होते हैं। आज के दिन हम सभी विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि एक अच्छा शिष्य बनना भी उतना ही आवश्यक है, जितना एक अच्छा शिक्षक बनना।”

शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बच्चों को जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और मेहनत का महत्व समझाया। कार्यक्रम का समापन ‘शिक्षक अभिवादन गीत’ और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावकगण उपस्थित रहे। समूचा आयोजन बच्चों की ओर से समर्पित था, जिसने यह सिद्ध किया कि शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते में विश्वास, श्रद्धा और स्नेह की डोर सबसे मजबूत होती है।
शिक्षक – समाज की आधारशिला
शिक्षक का दर्जा समाज में सदा से ही पूजनीय रहा है। कोई उन्हें गुरु कहता है, कोई आचार्य, कोई अध्यापक तो कोई टीचर। भले ही संबोधन अलग हों, किंतु सभी शब्द एक ऐसे महान व्यक्ति को इंगित करते हैं जो समाज को ज्ञान, संस्कार और दिशा प्रदान करता है। शिक्षक न केवल शैक्षणिक ज्ञान देता है, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है।
वास्तव में, एक शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का भविष्य गढ़ता है और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक समाज की आधारशिला होता है, जिस पर सभ्य, सशक्त और सुसंस्कृत समाज का निर्माण होता है।
एक सच्चा शिक्षक अपने जीवन के अंतिम क्षण तक अपने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करता है, उन्हें नैतिकता, कर्तव्य और मानवता का पाठ पढ़ाता है। इसी कारण शिक्षक को समाज में उच्चतम स्थान प्राप्त है, और उसे “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः” कहकर वंदना की जाती है।
इस पावन अवसर पर, आइए हम सभी अपने शिक्षकों को नमन करें और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।
आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई!

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
