
छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ में आदिवासी आश्रम की दुर्दशा: टपकती छतें, बदबूदार कमरे और भीगी ज़िंदगियां
📍 रायगढ़/धरमजयगढ़।
“स्वच्छ भारत”, “सबको शिक्षा”, और “निरोग भारत” जैसे सरकारी नारों के बीच धरमजयगढ़ विकासखंड का कुमरता आदिवासी आश्रम एक शर्मनाक हकीकत बयां कर रहा है। शिक्षा और सुरक्षा की उम्मीदों के साथ यहां लाए गए बच्चे, बदहाल व्यवस्था और प्रशासन की लापरवाही के बीच अपनी नींद, स्वास्थ्य और भविष्य से समझौता करने को मजबूर हैं।
छत से टपकता पानी, दलदल में बदलते कमरे
बारिश के मौसम में जहां बच्चों को गर्म चाय और किताबों के साथ स्कूल की क्लास में होना चाहिए, वहां कुमरता आश्रम में रहने वाले 25 बच्चे टपकती छतों के नीचे, कीचड़ भरे कमरों और बदबूदार बिस्तरों के बीच अपनी रातें काट रहे हैं। गद्दे, किताबें और कपड़े सभी भीग जाते हैं। नींद नहीं, बेचैनी और बीमारी इन बच्चों की साथी बन चुकी है।
बदइंतजामी की इंतहा
आश्रम अधीक्षक क्रीतराम नागवंशी, जिनके ऊपर बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी है, वे खुद प्राथमिक शाला पढ़ाने चले जाते हैं, और जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों की ज़िंदगी के साथ किया गया सीधा खिलवाड़ है।
बच्चे या कैदी?
आश्रम की स्थिति किसी शिक्षण संस्थान से ज्यादा खंडहर या जेल जैसी प्रतीत होती है। अंदर फैली गंदगी, बदबू, कचरा और बीमारियों का डर – यह सब ऐसे माहौल को दर्शाता है जिसमें एक बच्चा न तो पढ़ सकता है, न स्वस्थ रह सकता है, और न ही सुरक्षित महसूस कर सकता है।

सिस्टम पर बड़े सवाल
सरकार की योजनाएं कागजों में भले ही रंगीन दिखाई देती हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुमरता जैसे आश्रमों में साफ दिखाई देती है। सवाल यह नहीं है कि बजट कितना आया, सवाल यह है कि वह खर्च कहां हुआ?
> ❓ क्या आदिवासी बच्चों का भविष्य किसी एजेंडे में शामिल नहीं?
❓ भीगी किताबों के साथ क्या इनका भविष्य भी बह जाएगा?
❓ जब प्रशासन ही आंखें मूंद ले, तो इन मासूमों की आवाज कौन सुनेगा?
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अब जरूरी है जवाबदेही
यह खबर केवल एक आश्रम की कहानी नहीं, यह उस सिस्टम की विफलता की तस्वीर है, जो घोषणाओं से गूंजता है लेकिन ज़मीन पर गूंगा नजर आता है। अब वक्त है कि जिम्मेदार अफसरों और नेताओं से सवाल पूछे जाएं – सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि कार्यवाही और सुधार के स्तर पर।
📢 समाचार पोर्टल की टीम प्रशासन से जवाबदेही की मांग करती है – और तब तक करती रहेगी जब तक इन मासूमों को उनका हक़ नहीं मिल जाता।
न्यूज पोर्टल: तिल्दा टाइम्स CG न्यूज
तारीख: 27 अगस्त 2025

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
