
साइकिल पाकर खिल उठे बालिकाओं के चेहरे
तिल्दा नेवरा।
स्थानीय बद्रीनारायण बगड़िया शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवरा में एक उल्लासपूर्ण आयोजन के
अंतर्गत कक्षा 9वीं की 55 बालिकाओं को छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना के तहत निःशुल्क साइकिलें प्रदान की गईं। साइकिल प्राप्त कर छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे और उनके सपनों को नई रफ्तार मिली।
इस विशेष अवसर पर शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार शर्मा, नगर पालिका वार्ड पार्षद रानी सौरभ जैन, एवं अन्य समिति सदस्यगण – डॉ. लक्ष्मण साहू, आनंद शर्मा, अमित अग्रवाल, बेबी गोस्वामी, अनीता सक्सेना, सौरभ जैन, सागर पंजवानी, प्रियंक सोनी, गणेश शर्मा, दिलहरण निषाद एवं सुरेश लखवानी – ने छात्राओं का तिलक कर स्वागत किया और साइकिलें सौंपी।

मुख्य अतिथि नरेंद्र कुमार शर्मा ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा,
> “आप सभी मन लगाकर पढ़ाई करें और जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंचें।”
पार्षद रानी सौरभ जैन ने शासन की इस योजना की सराहना करते हुए कहा,
> “यह योजना विशेष रूप से उन बालिकाओं के लिए वरदान है, जो लंबी दूरी के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाती थीं। अब वे आसानी से स्कूल पहुंच सकेंगी।”
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य एवं वरिष्ठ व्याख्याता जितेंद्र कुमार जेहोआश, खूबचंद कश्यप, चुरामन लाल निषाद, सुषमा दुबे, अल्का मिश्रा, किरण साहू, टी. खाखा, कांति बड़ा एवं सविता वर्मा भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन भगवान सिंह नेताम एवं नरेंद्र रात्रि के मार्गदर्शन में कक्षा 9वीं की शिक्षिकाओं कुसुम नाग व खुशबू रामटेके ने किया।
इस पहल से स्पष्ट है कि शासन की योजनाएं यदि सही ढंग से क्रियान्वित की जाएं, तो वे समाज के वंचित वर्ग के लिए आशा की किरण बन सकती हैं।
छत्तीसगढ़ में सरस्वती साइकिल योजना शासकीय विद्यालयों और अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) श्रेणी की छात्राओं को दी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को स्कूल जाने में सुविधा प्रदान करना और शिक्षा को बढ़ावा देना है.
यह योजना 2004-05 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के नामांकन को बढ़ावा देना और स्कूल छोड़ने की दर को कम करना है. योजना के तहत, पात्र छात्राओं को मुफ्त साइकिलें वितरित की जाती हैं, जिससे उन्हें स्कूल आने-जाने में आसानी होती है और वे अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाती हैं.

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
