
धमतरी: मिली जानकारी के अनुसार रायपुर से तीन दोस्त सुरेश तांडी 34 वर्ष संतोषी नगर, नितिन तांडी 32 वर्ष संतोषी नगर, आलोक ठाकुर 28 वर्ष सेजबहार, अपने एक अन्य दोस्त के साथ ग्राम सोरम में राहुल नाम के दोस्त से मिलने पहुंचे थे. जहां पांचों दोस्तों ने ढाबा में खाना खाने की प्लानिंग की. पांचों दोस्त खाना खाने ढाबा जाने के लिए नगरी रोड में निकले थे,
इसी दौरान भोयना के पास अन्नपूर्णा ढाबा में जैसे ही पहुंचे. वहां पर पहले से पहुंचे कुछ युवक खाना खाने के बाद विवाद और आने जाने वाले लोगों से लूटपाट कर रहे थे. आरोपियों का सामना पांचों दोस्तों से हो गया. जिसके बाद आरोपियों ने युवकों से झगड़ा शुरू कर दिया. झगड़ा इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने खंजर से युवकों पर हमला कर दिया. इस घटना में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई. आधा घंटे तक आरोपियों ने ढाबा के पास तांडव मचाया. जिससे दहशत का माहौल है.
इस मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए रात को ही आठ आरोपियों को हिरासत में ले लिया ,जिनमें दो नाबालिग है. धमतरी ए एसपी ने बताया- 8 संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है. ढाबा संचालकों और सीसीटीवी फुटेज से मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई की जा रही है. रायपुर के रहने वाले तीन युवकों की हत्या हुई है. लूटपाट के बारे में फिलहाल कुछ जानकारी नहीं है.
धमतरी जिले के भोयना गांव में स्थित अन्नपूर्णा ढाबा सोमवार की रात खून से लाल हो गया। रायपुर से आए तीन दोस्तों की बेगुनाही की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। यह न सिर्फ एक त्रिकाल हत्या कांड है, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने की भी चीर-फाड़ है जिसमें लचर कानून व्यवस्था, अपराधियों का दुस्साहस और आमजन की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।
घटना की पृष्ठभूमि:
सुरेश तांडी, नितिन तांडी और आलोक ठाकुर – तीनों युवा अपने चौथे दोस्त के साथ धमतरी के सोरम गांव आए थे। खाना खाने निकले, लेकिन अन्नपूर्णा ढाबा पहुंचते ही उनकी किस्मत ने मोड़ ले लिया। वहां पहले से मौजूद अपराधी खाना खाकर न केवल विवाद कर रहे थे, बल्कि लूटपाट भी कर रहे थे। कहासुनी के बाद विवाद इतना बढ़ा कि तीनों पर खंजर से हमला कर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई।
सवालों के घेरे में व्यवस्था:
आखिर ऐसी जगह, जहां से मुख्य सड़क गुजरती है, वहां आधे घंटे तक तांडव कैसे चलता रहा?
स्थानीय पुलिस गश्त कहां थी?
क्या ढाबा संचालक ने पहले भी इन आरोपियों की गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया था?
अपराधियों का दुस्साहस और नाबालिगों की संलिप्तता:
धमतरी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आठ आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनमें दो नाबालिग हैं। यह नाबालिग शब्द अब अपराध से छूट पाने का मार्ग नहीं बन सकता। समाज को यह तय करना होगा कि 17 साल का लड़का अगर खंजर उठाता है, तो वह मासूम नहीं, एक संगठित अपराधी है।
जनता में भय, प्रशासन में मौन:
इस हत्याकांड ने जनमानस में गहरा भय और आक्रोश पैदा किया है। लोग अब अपने ही राज्य में, खुले ढाबों पर भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। यह केवल तीन युवकों की हत्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा की हत्या है।
धमतरी की इस रात को सिर्फ एक अपराध के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह एक चेतावनी है – प्रशासन, समाज और न्याय प्रणाली सभी के लिए। अब समय आ गया है कि हम ‘घटना होने के बाद की प्रतिक्रिया’ की बजाय पूर्व रोकथाम की मानसिकता अपनाएं। अपराधियों को सजा मिले – यह ज़रूरी है, पर उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है – ऐसी घटनाओं का दोहराव रोकना।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
