
पहचान छिपाकर राज्यों में बदलते रहे ठिकाने, 3 साल बाद हत्या के फरार आरोपी गिरफ्तार
तिल्दा-नेवरा पुलिस की रणनीतिक घेराबंदी सफल, तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर सूचना से मिली बड़ी सफलता
तिल्दा-नेवरा (रायपुर ग्रामीण):
करीब तीन साल पुराने सनसनीखेज हत्या मामले में फरार चल रहे तीन आरोपियों को तिल्दा-नेवरा पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग राज्यों में ठिकाना बदलते हुए पुलिस को चकमा दे रहे थे, लेकिन सतत निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।
क्या था पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में ग्राम कुंदरू निवासी जितेंद्र पाल की ग्राम जलसो में कुछ आरोपियों द्वारा चाकू और लाठी से निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हमले में मृतक के पुत्र पर भी प्राणघातक हमला किया गया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था।
इस मामले में मुख्य आरोपी आशु उईके समेत कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था, लेकिन कुछ आरोपी घटना के बाद से फरार थे।
तीन साल तक पुलिस से बचते रहे आरोपी
फरार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी पहचान बदलते रहे और अलग-अलग राज्यों में छिपकर रह रहे थे। वे मोबाइल और अन्य माध्यमों का सीमित उपयोग कर पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश कर रहे थे।
मुखबिर की सूचना बनी सफलता की कुंजी
हाल ही में पुलिस को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी अपने गृह ग्राम जलसो आने वाले हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक रमाकांत तिवारी के नेतृत्व में टीम गठित की गई।
पुलिस ने सुनियोजित तरीके से अलग-अलग स्थानों पर घेराबंदी कर दबिश दी और तीनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी:
फेन्टा उर्फ फिरन्ता पारधी (26 वर्ष)
मनोज उईके (30 वर्ष)
ईशु उईके (26 वर्ष)
(सभी निवासी ग्राम जलसो)
इन धाराओं में हुई कार्रवाई:
आरोपियों के खिलाफ धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 458 (गंभीर अपराध के इरादे से घर में घुसना), 147, 148, 149 (बलवा), 294 (गाली-गलौज), 506बी (आपराधिक धमकी), 427 (नुकसान पहुंचाना), 384 (जबरन वसूली) भादवि तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल रायपुर भेज दिया गया है।
तिल्दा-नेवरा पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों के लिए कानून से बच पाना आसान नहीं है। वर्षों तक फरार रहने के बावजूद अंततः अपराधियों को गिरफ्त में आना ही पड़ता है। इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को मजबूती मिली है और आमजन में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
