
वर्दी की गरिमा भूला आरक्षक: ‘हाय रानी-हेलो रानी’ पर रील बनाना पड़ा भारी, SSP ने किया लाइन अटैच
बिलासपुर | 7 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर से पुलिस अनुशासन से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक आरक्षक को वर्दी पहनकर सोशल मीडिया रील बनाना भारी पड़ गया। वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित आरक्षक को लाइन अटैच कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मस्तुरी थाना क्षेत्र में पदस्थ कांस्टेबल देवानंद कैवर्त्य सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ एक इंस्टाग्राम रील बनाई, जिसमें वे पुलिस की आधिकारिक वर्दी में नजर आ रहे हैं। इस रील में दोनों लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गाने ‘हाय रानी, हेलो रानी’ पर डांस करते दिखाई देते हैं।
वीडियो अपलोड होते ही तेजी से वायरल हो गया और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल गया। मामला जब पुलिस प्रशासन के संज्ञान में आया, तो इसे गंभीरता से लिया गया।
SSP ने लिया सख्त एक्शन
वीडियो की पुष्टि के बाद SSP रजनेश सिंह ने इसे पुलिस विभाग की छवि के विपरीत और अनुशासनहीनता का मामला बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्दी पहनकर इस तरह की निजी और मनोरंजनात्मक गतिविधियाँ करना ‘अशोभनीय आचरण’ की श्रेणी में आता है।
तत्काल प्रभाव से:
आरक्षक को लाइन अटैच किया गया
विभागीय जांच के आदेश दिए गए
वर्दी के दुरुपयोग को कार्रवाई का मुख्य आधार माना गया
विभाग का सख्त संदेश
इस घटना के जरिए पुलिस विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि सम्मान, जिम्मेदारी और जनता के भरोसे का प्रतीक है। इसे पहनकर किसी भी प्रकार की निजी प्रस्तुति या मनोरंजन करना नियमों के खिलाफ है।
SSP ने सभी पुलिसकर्मियों को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में यदि कोई भी इस तरह की अनुशासनहीनता करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया और वर्दी: बढ़ती चुनौती
पिछले कुछ समय में पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही अनुशासन और आचार संहिता का पालन भी उतना ही जरूरी हो गया है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई छोटी सी लापरवाही भी विभागीय कार्रवाई का कारण बन सकती है।
यह घटना न केवल पुलिस विभाग के अनुशासन को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सरकारी सेवा में रहते हुए व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की भी सीमाएं होती हैं—खासकर तब, जब बात वर्दी और उसकी गरिमा की हो।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
