
करूमौहा पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव विफल, सरपंच ने बहुमत से बचाई कुर्सी
दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाया विपक्ष, 8 वोटों पर अटका प्रस्ताव; सरपंच समर्थकों ने मनाया जश्न
कोरबा (छत्तीसगढ़)। विशेष रिपोर्ट
कोरबा जिले के ग्राम पंचायत करूमौहा में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच सरपंच के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव आखिरकार विफल हो गया। इस पूरे घटनाक्रम में सरपंच ने बहुमत हासिल करते हुए अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त की, जिससे पंचायत की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत में कुल 12 पंच हैं। नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए विपक्ष को दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 9 वोटों की आवश्यकता थी। हालांकि मतदान के दौरान विपक्ष केवल 8 वोट ही जुटा सका, जिसके चलते प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया।
वहीं, सरपंच को 4 वोट प्राप्त हुए, जो एक-तिहाई से अधिक होने के कारण उनके पक्ष में निर्णायक साबित हुए। इस परिणाम के साथ ही सरपंच को हटाने की विपक्ष की कोशिशें पूरी तरह नाकाम हो गईं और उन्होंने अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया।

मतदान के बाद पंचायत में उत्साह का माहौल देखने को मिला। सरपंच समर्थकों और ग्रामीणों ने जीत का जश्न मनाते हुए जोरदार स्वागत किया। पारंपरिक तरीके से खुशी जाहिर करते हुए सरपंच को दूध से नहलाया गया और मिठाइयां बांटी गईं। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
समर्थकों का कहना है कि यह जीत विकास कार्यों और जनता के विश्वास की जीत है। उनका मानना है कि सरपंच ने अपने कार्यकाल में जो काम किए हैं, उसी का परिणाम उन्हें समर्थन के रूप में मिला है।
दूसरी ओर, इस घटनाक्रम के बाद पंचायत की राजनीति में नई सरगर्मी देखने को मिल रही है। राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं और आने वाले समय में इसका असर पंचायत के विकास कार्यों और निर्णयों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, करूमौहा पंचायत का यह घटनाक्रम न केवल स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर जनसमर्थन ही किसी भी नेतृत्व की असली ताकत होता है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
