
तिल्दा टाईम्स संवाददाता रायपुर
विधानसभा में गूंजा डीएपी खाद की कमी का मुद्दा, मंत्री नेताम के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया विरोध
रायपुर, 14 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद की कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विपक्षी विधायकों ने खाद की किल्लत को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की बढ़ती परेशानियों को लेकर चिंता जताई।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के विधायकों ने आरोप लगाया कि खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही राज्य के कई जिलों में डीएपी और अन्य जरूरी उर्वरकों की भारी कमी देखने को मिल रही है। किसानों को लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है, और समय पर खाद न मिलने से फसलें प्रभावित हो रही हैं।
इस मुद्दे पर कृषि मंत्री रविंद्र नेताम ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से आवश्यक मात्रा में उर्वरक की मांग की है और वितरण की निगरानी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश जिलों में स्थिति नियंत्रण में है और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन सतर्क है।
मंत्री नेताम ने आगे बताया कि अब तक राज्य को 75% आवश्यक डीएपी आपूर्ति मिल चुकी है, और शेष मात्रा अगले सप्ताह तक उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के संपर्क में है और रेल रैक से आने वाली खेपों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
हालांकि मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ ,इसके बाद विपक्षी विधायकों ने सदन के भीतर जोरदार नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ “किसान विरोधी सरकार हाय-हाय” के नारे लगाए। विधानसभा अध्यक्ष ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की।
प्रदेश में किसानों को डीएपी और अन्य आवश्यक खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर आज विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत के नेतृत्व में 23 विधायकों ने राज्य सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एक प्रस्ताव पेश किया।
विधायकों का कहना है कि पूरे प्रदेश में इस समय धान की रोपाई जोरों पर है, लेकिन खाद की उपलब्धता बेहद सीमित है। किसानों को घंटों लंबी कतार में खड़े रहने के बावजूद खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ रहा है।
डॉ. महंत ने कहा,
> “राज्य सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है। हर साल इसी समय खाद संकट गहराता है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। सरकार की असफलता का खामियाजा सीधे किसान भुगत रहे हैं।”
सरकार की सफाई
सरकार की ओर से कृषि मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि खाद आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार से समन्वय किया जा रहा है और जल्द ही राहत मिलेगी। लेकिन विपक्ष ने इसे ‘ढुलमुल जवाब’ करार देते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं।
किसानों की स्थिति
ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि खाद की किल्लत के कारण किसान मजबूर होकर काला बाज़ारी से महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं, या फिर धान की रोपाई में देरी कर रहे हैं, जिससे आने वाली फसल पर असर हो सकती है।”
विधानसभा में हंगामा
विपक्ष की ओर से एक महत्वपूर्ण विषय पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया गया था, जिस पर मंत्री रामविचार नेताम ने सदन में जवाब दिया। जवाब के पश्चात् विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री सहित कांग्रेस के सभी विधायक सदन के गर्भगृह में पहुँच गए और सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
विधानसभा के नियमों के अनुसार, गर्भगृह में अनाधिकृत रूप से प्रवेश करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसलिए नियमों के तहत सभी विधायक स्वचालित रूप से निलंबित माने गए।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज
इस घटना के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस मुद्दों से भटकाव के लिए ड्रामा कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाया गया यह मुद्दा किसानों की एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है। उनके अनुसार:
DAP खाद (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की भारी कमी है, जबकि यही खाद धान की बुवाई के समय सबसे ज्यादा जरूरी होती है।
किसानों को सहकारी समितियों (सोसाइटी) से खाद नहीं मिल रही है, जबकि खुले बाजार में ऊंचे दामों (₹1800-₹2000) में यह खाद उपलब्ध है।
यदि समय पर DAP खाद उपलब्ध नहीं हुई, तो इसका सीधा असर धान की पैदावार पर पड़ेगा, जिससे उत्पादन घट सकता है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर खाद की कमी पैदा कर रही है, ताकि कम धान खरीदा जाए और सरकार की खरीद ज़िम्मेदारी घटे।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है:
1. DAP खाद की कमी से धान की उपज घट सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा।
2. अगर सरकारी समितियों से खाद न मिलकर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बिक रहा है, तो यह कालाबाज़ारी और आपूर्ति चक्र की गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
3. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खाद की उचित मात्रा और कीमत पर उपलब्धता बनी रहे, खासकर बुवाई के मौसम में।
संभावित समाधान:
खाद वितरण की मोनिटरिंग और पारदर्शिता बढ़ाई जाए।
यदि कहीं भंडारण या आपूर्ति में गड़बड़ी हो रही है, तो जांच कर कार्रवाई हो।
किसानों को डिजिटल टोकन या पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी वितरण व्यवस्था मुहैया कराई जाए।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
