
अम्बिकापुर में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे पर प्रशासन सख्त, 20 मार्च तक हटाने का अल्टीमेटम
विशेष रिपोर्ट | अम्बिकापुर/सरगुजा
सरगुजा संभाग के अम्बिकापुर से सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस विभाग के एक कर्मचारी का नाम आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत मिलने के बाद राजस्व प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है और संबंधित व्यक्ति को अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए हैं।
शिकायत के बाद खुलासा
मामले की शिकायत स्थानीय नागरिक जितेन्द्र कुमार जायसवाल द्वारा की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम अजीरमा (पटवारी हल्का नंबर-56) स्थित शासकीय भूमि, खसरा नंबर 74/1 (कुल रकबा लगभग 2.480 हेक्टेयर) में से करीब 0.700 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है।
आरोपों के अनुसार, प्रधान आरक्षक रविन्द्र भारती द्वारा उक्त भूमि पर शेड निर्माण, बाउंड्री वॉल (प्रिकार) और कृषि गतिविधियां (मक्का की बुवाई) की जा रही थीं, जिससे यह निजी संपत्ति जैसा प्रतीत हो रहा था।
ड्यूटी से अनुपस्थिति पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक, रविन्द्र भारती का तबादला एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले में किया गया था, लेकिन वे सूरजपुर पुलिस लाइन में अटैच बताए जा रहे हैं। यह भी जानकारी सामने आई है कि वे पिछले लगभग एक माह से नियमित ड्यूटी से अनुपस्थित हैं। विभागीय स्तर पर वेतन रोकने की चर्चा के बीच अतिक्रमण का यह मामला सामने आने से स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
प्रशासन का स्पष्ट निर्देश
राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त तहसीलदार न्यायालय, अम्बिकापुर-02 द्वारा आदेश जारी कर निम्न निर्देश दिए गए हैं:

शासकीय भूमि पर चल रहे सभी निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद किए जाएं
संबंधित व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित होकर वैध दस्तावेज प्रस्तुत करे
20 मार्च 2026 तक अतिक्रमण स्वेच्छा से हटाया जाए
निर्धारित समयसीमा में पालन नहीं होने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेश की अवहेलना की स्थिति में शासकीय अमला स्वयं अतिक्रमण हटाएगा और कार्रवाई में आने वाला खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।
पुलिस व राजस्व अमले को निर्देश
आदेश में थाना प्रभारी गांधीनगर, राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाने, नोटिस की तामील सुनिश्चित करने तथा समयसीमा के भीतर पालन प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कानून के दायरे में मामला
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत शासकीय भूमि पर अतिक्रमण दंडनीय अपराध है। ऐसे में जब आरोप किसी वर्दीधारी कर्मचारी पर लगे, तो यह मामला और अधिक संवेदनशील हो जाता है।
जनता की नजर प्रशासन पर
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कानून लागू कराने वाले ही नियमों का उल्लंघन करेंगे, तो आम जनता का भरोसा कमजोर होगा।
अब इस मामले में सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है—क्या तय समयसीमा में अतिक्रमण हटेगा और क्या संबंधित कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई होगी, या यह मामला भी कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगा।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
