दुर्ग में बोर्ड परीक्षा से पहले 10 वीं की छात्रा की मौत, प्रवेश पत्र लेकर लौटी थी घर, इलाके में शोक ,पुलिस जांच में जुटी

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दुर्ग में बोर्ड परीक्षा से पहले 10वीं की छात्रा की मौत, प्रवेश पत्र लेकर लौटी थी घर


इलाके में शोक, पुलिस जांच में जुटी


दुर्ग, 17 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र स्थित घासीदास नगर में 17 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घटना उस समय हुई जब छत्तीसगढ़ बोर्ड की 10वीं की परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता का माहौल है।


मृतका की पहचान नारायणी साहू के रूप में हुई है, जो स्वामी आत्मानंद विद्यालय की कक्षा 10वीं की छात्रा थी। परिजनों के अनुसार, वह सोमवार को स्कूल से अपना प्रवेश पत्र लेकर घर लौटी थी। परिवार ने बताया कि वह देर रात तक पढ़ाई कर रही थी। मंगलवार सुबह जब परिजन उसे जगाने पहुंचे तो वह अपने कमरे में अचेत अवस्था में मिली। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।


सूचना मिलते ही जामुल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया गया तथा पोस्टमार्टम के लिए चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। परिजनों, शिक्षकों और सहपाठियों से पूछताछ कर घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।


मानसिक दबाव पर फिर उठे सवाल
यह घटना बोर्ड परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव की ओर एक बार फिर ध्यान आकर्षित करती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का समय कई विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील होता है। अपेक्षाओं, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चिंता के कारण कुछ छात्र अत्यधिक तनाव महसूस कर सकते हैं।


मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे समय में अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बच्चों से संवाद बनाए रखना, उनकी भावनाओं को समझना और परिणाम से अधिक प्रयास को महत्व देना जरूरी है। यदि किसी छात्र के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे—जैसे चिड़चिड़ापन, अत्यधिक चुप्पी, नींद या भूख में बदलाव—तो इसे गंभीरता से लेते हुए समय रहते परामर्श लेना चाहिए।


संवाद और सहारा ही समाधान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परीक्षा को जीवन-मरण का प्रश्न न बनाया जाए। विद्यार्थियों को यह समझाना आवश्यक है कि एक परीक्षा उनके पूरे भविष्य का निर्धारण नहीं करती। परिवार और विद्यालय का सहयोग, सकारात्मक माहौल और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर काउंसलिंग कई समस्याओं को टाल सकती है।


फिलहाल पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से बचें और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा न करें।


यदि आप या आपके आसपास कोई विद्यार्थी अत्यधिक तनाव में है, तो उससे खुलकर बात करें और आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ सहायता लेने में संकोच न करें। समय पर संवाद और सहयोग कई अनहोनी को टाल सकता है।

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