
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का तीखा हमला: “घोर लापरवाही और लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार”
अम्बिकापुर। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित रूप से वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा और पूरे प्रकरण को “घोर लापरवाही” करार दिया है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
1143 नामों पर विवाद, संख्या बढ़ने की आशंका
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, शहर क्षेत्र में अब तक 1143 ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनके नाम कथित तौर पर नियम-विरुद्ध तरीके से मतदाता सूची से विलोपित करने की अनुशंसा की गई। पार्टी का दावा है कि यदि समय रहते जांच और सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे जिले में यह संख्या कई हजार तक पहुंच सकती है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन फॉर्म-7 का दुरुपयोग करते हुए एक वर्ग विशेष के मतदाताओं को “मृत” या “अन्यत्र स्थानांतरित” दिखाकर उनके नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कांग्रेस ने इसे सुनियोजित और गंभीर प्रशासनिक चूक बताया है।
“नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम हटाने की अनुशंसा की गई, उनमें वर्तमान पार्षद, पूर्व पार्षद, बूथ-स्तरीय कार्यकर्ता और शासकीय सेवाओं में कार्यरत व्यक्ति भी शामिल हैं—जो आज भी संबंधित वार्डों के स्थायी निवासी हैं।
पार्टी ने निर्वाचन नियमों का हवाला देते हुए कहा कि किसी मतदाता के नाम विलोपन हेतु आवेदन करने वाला व्यक्ति उसी मतदान केंद्र का मतदाता होना चाहिए। अधिकांश मामलों में यह मूल शर्त पूरी नहीं हुई, जिससे प्रक्रिया की वैधता पर प्रश्न खड़े होते हैं।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में कांग्रेस ने निम्नलिखित मांगें रखीं—
नियम-विरुद्ध भरे गए सभी फॉर्म-7 को तत्काल निरस्त किया जाए।
पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/व्यक्तियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
भविष्य में केवल नियमसम्मत और सत्यापित आवेदनों को ही स्वीकार किया जाए।
वैध मतदाताओं के नाम हटने से रोकने हेतु सख्त सुरक्षा एवं सत्यापन तंत्र लागू किया जाए।
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि गलत जानकारी देकर फॉर्म-7 भरे जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की पहल की जाएगी।
“लोकतंत्र की आधारशिला पर चोट”
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में शहर कांग्रेस अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की मूल आधारशिला है और किसी भी वैध मतदाता का नाम हटना उसके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी व्यापक जनआंदोलन पर विचार कर सकती है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल स्थानीय स्तर पर असंतोष और संशय का माहौल बना हुआ है।
चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पुनरीक्षण के दौरान पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाना आवश्यक है, ताकि इस प्रकार के विवादों से बचा जा सके और मतदाताओं का भरोसा कायम रहे।
अब सबकी निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
