
78 साल बाद भी अंधेरे में आदिवासी गांव: बिजली की मांग को लेकर 8 पंचायत
ों के ग्रामीणों ने फिर जाम किया नेशनल हाईवे
गरियाबंद | मैनपुर | 12 जनवरी 2026
देश जहां डिजिटल इंडिया और 24×7 पावर सप्लाई की बात कर रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी रातें अंधेरे में कट रही हैं। आज़ादी के 78 साल बाद भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित सैकड़ों ग्रामीणों का सब्र सोमवार को एक बार फिर टूट गया। बिजली की मांग को लेकर 8 पंचायतों के ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-130C को जाम कर दिया।
20 से अधिक गांवों के 2 हजार ग्रामीण सड़क पर उतरे
मैनपुर ब्लॉक के राजा पड़ाव क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 30 गांवों से करीब 2 हजार से अधिक महिला-पुरुष ग्रामीण प्रदर्शन में शामिल हुए। ये ग्रामीण 20 से ज्यादा विद्युतविहीन गांवों में तत्काल बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे हैं। हाईवे जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और घंटों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा।
कोर जोन का हवाला देकर वर्षों से लटका विद्युतीकरण
ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव उदंती-सीता नदी अभयारण्य के कोर जोन में स्थित हैं। पर्यावरणीय कारणों से यहां ओवरहेड लाइन की अनुमति नहीं थी, लेकिन अंडरग्राउंड बिजली लाइन बिछाने की प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। इसके बावजूद बजट के अभाव में आज तक काम शुरू नहीं हो सका।
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि विद्युतीकरण परियोजना को मंजूरी तो मिली, लेकिन फंड जारी न होने के कारण फाइलें दफ्तरों में धूल खा रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के बाद बिना किसी स्पष्ट प्रशासनिक या कानूनी आदेश के काम रोक दिया गया, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक साल में चौथी बार नेशनल हाईवे जाम
राजा पड़ाव क्षेत्र में बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा यह पिछले एक साल में चौथी बार नेशनल हाईवे जाम किया गया है। प्रदर्शन का नेतृत्व अंबेडकरवादी समिति के अध्यक्ष पतंग नेताम, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम ने किया।
पेसा कानून लागू, फिर भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि राजा पड़ाव क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र है, जहां पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम 1996 (पेसा एक्ट) लागू है। इसके बावजूद यहां रहने वाले आदिवासी समुदाय आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं, जो शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
8 पंचायतों में सिर्फ 3 में आंशिक विद्युतीकरण
राजा पड़ाव क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों में से केवल अड़गड़ी, शोभा और गोना पंचायतों में आंशिक विद्युतीकरण हो पाया है। जबकि भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव पंचायतों के ग्रामीण आज भी बिजली के इंतजार में हैं।
“बिजली सिर्फ सुविधा नहीं, जीवन का सवाल है”
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि बिजली का अभाव केवल सुविधा की कमी नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सिंचाई और आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा मुद्दा है।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है
रात में महिलाओं की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है
किसान आधुनिक कृषि संसाधनों से वंचित हैं
स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हो गई हैं
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (सम्मानजनक जीवन का अधिकार), अनुच्छेद 21-क (शिक्षा का अधिकार) तथा सामाजिक न्याय से जुड़े अनुच्छेद 38 और 39 की भावना के खिलाफ है।
राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का ऐलान
आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विद्युतीकरण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने का ऐलान भी किया है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
