औद्योगिक इकाई पर गंभीर आरोपों की बौछार, पर्यावरण, श्रमिक और ग्रामीण हितों के उल्लंघन का आरोप

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औद्योगिक इकाई पर गंभीर आरोपों की बौछार, पर्यावरण, श्रमिक और ग्रामीण हितों के उल्लंघन का आरोप


जिला युवा कांग्रेस ने SDM से की शिकायत, ‘राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड’ पर जांच की मांग


रायपुर/बिलासपुर (ग्रामीण)।
बिलासपुर जिले की मस्तूरी तहसील अंतर्गत पाराघाट क्षेत्र में संचालित राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड एक बार फिर विवादों में घिर गई है। जिला युवा कांग्रेस बिलासपुर (ग्रामीण) ने औद्योगिक इकाई पर पर्यावरण नियमों की अनदेखी, श्रमिक अधिकारों के हनन और ग्रामीण हितों को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मस्तूरी को लिखित शिकायत सौंपी है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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यह शिकायत जिला युवा कांग्रेस के कार्यकारी जिलाध्यक्ष सुनील पटेल के हस्ताक्षर से प्रस्तुत की गई है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन को प्रभावित ग्रामीणों और कर्मचारियों के साथ मिलकर आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और SDM कार्यालय घेराव जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


बिना अनुमति चल रही कोल वॉशरी?
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि औद्योगिक इकाई द्वारा आवश्यक वैधानिक अनुमति और पर्यावरणीय NOC की स्थिति स्पष्ट किए बिना कोल वॉशरी का संचालन किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह पर्यावरण संरक्षण कानूनों और औद्योगिक नियमों का खुला उल्लंघन माना जाएगा।

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लीलागर नदी के जल पर संकट
औद्योगिक गतिविधियों के कारण लीलागर नदी के जल की गुणवत्ता प्रभावित होने की गंभीर आशंका जताई गई है। नदी क्षेत्र के आसपास बसे गांवों में खेती और पेयजल के लिए इसी नदी पर निर्भरता है, ऐसे में जल प्रदूषण से किसानों और ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।


PF कटौती पर सवाल
श्रमिक हितों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि (PF) के नाम पर 24 प्रतिशत राशि की कटौती की जा रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि उक्त राशि वास्तव में कर्मचारियों के खातों में जमा की जा रही है या नहीं। इससे श्रमिकों में असंतोष और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

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CSR केवल कागजों तक सीमित?
कंपनी पर यह भी आरोप है कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत स्थानीय क्षेत्र में किए जाने वाले विकास कार्य केवल कागजों में दिखाए जा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और अन्य सामाजिक कार्यों में अपेक्षित योगदान नहीं दिया जा रहा, जबकि नियमों के अनुसार CSR फंड का स्थानीय विकास में उपयोग अनिवार्य है।


विस्थापितों को रोजगार नहीं
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि भूमि अधिग्रहण के समय किए गए वादों के बावजूद विस्थापित किसानों और उनके परिजनों को रोजगार नहीं दिया गया। इससे क्षेत्र में सामाजिक असंतोष बढ़ रहा है और प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।


PMGSY की सड़कें जर्जर
औद्योगिक इकाई से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी ग्रामीण सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन कंपनी द्वारा सड़क मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की कोई ठोस पहल नहीं की गई है।


धूल प्रदूषण से बिगड़ता जनजीवन
संयंत्र क्षेत्र और परिवहन मार्गों पर नियमित जल छिड़काव और सफाई व्यवस्था न होने से भारी मात्रा में धूल उड़ रही है। इससे आसपास के गांवों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।


भू-जल स्तर में लगातार गिरावट
औद्योगिक प्रयोजन के लिए भू-जल के अत्यधिक दोहन से आसपास के ग्रामीण इलाकों में जल स्तर तेजी से गिर रहा है। कई गांवों में हैंडपंप और कुएं सूखने की स्थिति में पहुंच गए हैं, जिससे आने वाले समय में गंभीर जल संकट की आशंका जताई जा रही है।


10 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
जिला युवा कांग्रेस ने प्रशासन को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन प्रभावित ग्रामीणों और श्रमिकों के साथ मिलकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेगा।


इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं होने पर SDM कार्यालय का घेराव किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित औद्योगिक इकाई और प्रशासन की होगी।


प्रशासन से की गई यह मांग
शिकायत पत्र के अंत में जिला प्रशासन से अपेक्षा जताई गई है कि वह जनहित को सर्वोपरि रखते हुए शीघ्र जांच कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि ग्रामीणों, किसानों और श्रमिकों की समस्याओं का समाधान हो सके और औद्योगिक गतिविधियां कानून एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालित की जा सकें।


अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितनी तेजी से संज्ञान लेता है और क्या आरोपों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करता है या मामला आगे आंदोलन की दिशा में बढ़ता है।

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