SECL कर्मचारी पर नौकरी के नाम पर ठगी ,शोषण और फर्जी पिता का नाम बताकर नौकरी पाने का गंभीर आरोप; गिरफ्तारी न होने पर आदिवासी युवती की आत्मदाह की चेतावनी से प्रशासन अलर्ट

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SECL कर्मचारी पर नौकरी के नाम पर ठगी, शोषण और फर्जी पिता का नाम बताकर नौकरी पाने का गंभीर आरोप; गिरफ्तारी न होने पर आदिवासी युवती की आत्मदाह की चेतावनी से प्रशासन अलर्ट

रायपुर / कोरबा | विशेष रिपोर्ट | 3 दिसम्बर 2025

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कोरबा जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के एक कर्मचारी पर लगे ठगी, शोषण और अब फर्जी पहचान बनाकर नौकरी हासिल करने के नए आरोपों ने पूरे जिले की कानून-व्यवस्था और SECL की भर्ती प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र की रहने वाली एक आदिवासी युवती ने SECL के पंप ऑपरेटर दीनदयाल गुप्ता (59) पर 2 लाख रुपये की ठगी, शारीरिक शोषण की कोशिश, धमकी, और नौकरी के नाम पर अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती की शिकायत पर पुलिस ने BNS की धारा 318(4) व धारा 74 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

लेकिन गिरफ्तारी न होने से पीड़िता ने अब IG ऑफिस के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी दी है, जिसके बाद मामला बेहद संवेदनशील हो गया है और पुलिस-प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।






मामला कैसे शुरू हुआ — नौकरी के लिए 5 लाख की मांग, 2 लाख नकद लेने का आरोप

पीड़िता का कहना है कि उसकी मुलाकात दीनदयाल गुप्ता से 20 मार्च 2025 को हुई थी।
दीनदयाल ने कथित तौर पर SECL में स्थाई नौकरी दिलाने के नाम पर 5 लाख रुपये की मांग की।

युवती के आरोप:

2 लाख रुपये उसने अपनी जमीन गिरवी रखकर नकद दिए

नौकरी नहीं लगी

पैसे वापस नहीं मिले

उल्टा आरोपी 3 लाख रुपये और देने का दबाव डालता रहा


पीड़िता का कहना है कि जब वह अपने पैसे मांगने आरोपी के घर (DQ-M-8, बलगी कॉलोनी) पहुँची, तो allegedly दीनदयाल ने कहा—

> “3 लाख दोगी तभी नौकरी लगवाऊँगा।”



आरोप है कि इसके बाद उसने युवती के सामने रात साथ बिताने का प्रस्ताव रखा, और विरोध करने पर जबरन शोषण की कोशिश की।

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SP के निर्देश पर FIR, पर गिरफ्तारी नहीं — सवालों के घेरे में पुलिस

पीड़िता की शिकायत के बाद SP सिद्धार्थ तिवारी ने मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए और FIR दर्ज हुई।

लेकिन दिनों बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, जिससे स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया में सवाल उठ रहे हैं कि—

> “इतने गंभीर आरोपों के बाद भी SECL कर्मचारी की गिरफ्तारी क्यों नहीं?”



पीड़िता का आरोप है कि दीनदयाल और उसका बेटा उसे लगातार केस वापस लेने का दबाव दे रहे हैं।

यह भी दावा किया गया है कि थाना स्टाफ भी उस पर प्रकरण वापस लेने का दबाव बना रहा है। पीड़िता के अनुसार थाना कर्मचारी C.S. वैष्णव ने अपने निजी मोबाइल नंबर से संपर्क कर समझौते के लिए दवाब बनाया।




सोशल मीडिया में वीडियो — “एक सप्ताह में गिरफ्तारी न हुई तो आत्मदाह कर लूंगी”

पीड़िता ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा:

> “अगर दीनदयाल गुप्ता को एक सप्ताह में गिरफ्तार नहीं किया गया,
तो मैं IG ऑफिस के सामने आत्मदाह कर लूंगी।”



इस चेतावनी से पुलिस-प्रशासन में खलबली मच गई है। IG संजीव शुक्ला ने पीड़िता से मुलाकात कर सुरक्षा देने का आश्वासन दिया है।




नया सनसनीखेज खुलासा — “दीनदयाल गुप्ता ने अपने पिता का नाम फर्जी बताया”

आरोपों के बीच अब एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।

पीड़िता द्वारा उपलब्ध दस्तावेज़ों और ग्राम चैनपुर, दीपिका के ग्रामीणों के अनुसार:

“दीनदयाल गुप्ता ने SECL में नौकरी पाने के लिए अपने पिता का नाम ‘समारू’ बताया, जबकि असली समारू के सिर्फ तीन पुत्र हैं — गेंदराम, संतराम और बहोरन।”

ग्रामवासी गेंदराम ने बयान दिया है कि:

> “हमारे पिता समारू के सिर्फ तीन बेटे हैं। दीनदयाल गुप्ता हमारे परिवार का सदस्य नहीं है।”





यानी सवाल खड़े हो रहे हैं:

क्या नौकरी पाने के लिए दीनदयाल ने फर्जी पिता का नाम बताया?

क्या SECL सर्विस बुक में भी यही नाम दर्ज है?

क्या नियुक्ति फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे हुई?


अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी/PSU नौकरी धोखाधड़ी का गंभीर मामला बन सकता है।




पीड़िता का दावा — “फर्जी पहचान बनाकर नौकरी ली, अब उसी का दुरुपयोग कर धमका रहा”

IG और SP से मुलाकात में पीड़िता ने कहा कि:

दीनदयाल ने फर्जी पहचान बनाकर SECL में नौकरी ली

अब इसी पहचान और SECL कर्मचारी होने के प्रभाव का दुरुपयोग कर रहा

पुलिसकर्मियों से मिलीभगत का दावा कर धमकाता है


पीड़िता ने यह भी कहा कि:

> “अगर दीनदयाल और उसके बेटे की कॉल डिटेल निकाली जाए तो कई पुलिसकर्मियों की मिलीभगत सामने आ जाएगी।”






ग्रामीणों में आक्रोश — “गरीब होते तो पुलिस उसी दिन घर तोड़कर ले जाती”

स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे मामले में पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है:

आरोपी खुलेआम घूम रहा है

थाना कर्मचारी पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं

पुलिस की कार्रवाई सुस्त और संदिग्ध दिखाई दे रही है


एक ग्रामीण ने कहा:

> “अगर गरीब आदमी होता, तो पुलिस उसी दिन उसे उठा ले जाती। SECL कर्मचारी के खिलाफ क्यों कमजोरी दिखा रही है?”



ग्रामीणों ने विशेष जांच टीम (SIT) बनाने की मांग की है ताकि प्रभाव और दबाव से मुक्त जांच हो सके।




अब सवाल जो प्रशासन को जवाब देने होंगे

1. आदिवासी युवती की FIR के कई दिन बाद भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?


2. क्या SECL कर्मचारी के प्रभाव में पुलिस ढील दे रही है?


3. फर्जी पिता का नाम बताकर नौकरी लेने की जांच SECL कब शुरू करेगा?


4. क्या इस मामले में BNS की अन्य धाराएँ व धोखाधड़ी संबंधी प्रकरण दर्ज होंगे?


5. पीड़िता द्वारा दी गई आत्मदाह की चेतावनी के बाद सुरक्षा व्यवस्था क्या है?






निष्कर्ष

SECL कर्मचारी दीनदयाल गुप्ता पर:

नौकरी के नाम पर ठगी

शारीरिक शोषण की कोशिश

पैसे लेकर नौकरी न दिलाने

धमकाने और दबाव डालने

और अब फर्जी पिता का नाम बताकर नौकरी हासिल करने


जैसे आरोपों ने पूरे जिले में रोष और चिंता पैदा कर दी है।

यह मामला न केवल पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाता है, बल्कि SECL की भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

अब सबकी निगाहें कोरबा SP और रेंज IG पर हैं कि वे इस अत्यंत संवेदनशील मामले में क्या निर्णायक कार्रवाई करते हैं और क्या पीड़िता को न्याय मिलेगा।

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