अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी गैंग का भंडाफोड़, 4 आरोपी  गिरफ्तार

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रायगढ़ : अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी गैंग का भंडाफोड़, चार आरोपी श्रीनगर से गिरफ्तार
पुलिस अधीक्षक दिव्यांग कुमार पटेल के निर्देशन में बड़ी कार्रवाई

रायगढ़, 24 नवंबर।
रायगढ़ पुलिस ने साइबर अपराध के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित होने वाले ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी शेयर मार्केट में भारी मुनाफा दिखाकर देशभर में लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे थे। गिरोह के तार देश के कई राज्यों एवं विदेश तक जुड़े होने की आशंका है।

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कैसे हुआ खुलासा?

ढिमरापुर निवासी एक उद्योगकर्मी दंपत्ति ने यूट्यूब पर शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा एक विज्ञापन देखा, जिसमें “यूके इंडिया चैनल” से जुड़ा होने का दावा किया गया था। दंपत्ति ने दिए गए लिंक पर संपर्क किया और कॉलर के कहने पर एक ऐप डाउनलोड किया। इसके बाद उन्हें आकर्षक मुनाफे का लालच देकर निवेश कराना शुरू किया गया।

20 मई 2025 से 30 अगस्त 2025 के बीच दंपत्ति ने अलग-अलग किश्तों में 1,08,44,025 रुपये विभिन्न खातों में जमा किए।
जुलाई में जब उन्होंने 32 लाख रुपये एकमुश्त जमा किए, तो ऐप में उनकी राशि बढ़कर 42 करोड़ रुपये दिखा दी गई। रकम निकालने पर उनसे 5 लाख रुपये ब्रोकरेज शुल्क मांगा गया, जिसे पीड़ित दंपत्ति ने जमा भी कर दिया।

इसके बाद कॉलर ने संपर्क बंद कर दिया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ितों ने 7 सितंबर को थाना कोतवाली रायगढ़ में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामला अपराध क्रमांक 460/2025 धारा 318(4) BNS में दर्ज हुआ।




बैंक खातों के विश्लेषण में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

साइबर सेल और कोतवाली पुलिस की संयुक्त जांच में पता चला कि जिन बैंक खातों का उपयोग दंपत्ति से रकम लेने में किया गया, उन खातों से जुड़े नंबरों और लेनदेन के पैटर्न के आधार पर यह एक बड़े संगठित नेटवर्क द्वारा की गई ठगी है।

जांच में सामने आया कि—

इस गिरोह के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 शिकायतें दर्ज हैं

10 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन इन खातों से हुआ है





श्रीनगर में छापेमारी, चार सदस्य गिरफ्तार

पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया कि पीड़ितों द्वारा जमा किए गए 32.50 लाख रुपये श्रीनगर निवासी यासीर शॉफी चारलू के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके आधार पर रायगढ़ पुलिस की विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से श्रीनगर के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की।

गिरफ्तारी का क्रम इस प्रकार रहा—

1. यासीर शॉफी चारलू
पूछताछ में उसने बताया कि उसने रकम मेहराज असाई को ट्रांसफर की और कुछ रकम नकद में भी दी।


2. मेहराज असाई
गिरफ्तार होने के बाद उसने खुलासा किया कि उसका बेटा अर्शलन अफॉक और सहयोगी साकीब फारूखदार भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।


3. अर्शलन अफॉक


4. साकीब फारूखदार



इन दोनों को भी पुलिस ने श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया।




कई धाराएं जोड़ी गईं, चार मोबाइल फोन जप्त

गिरोह के अंतरराज्यीय संगठित साइबर फ्रॉड गैंग होने की पुष्टि के बाद पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए—

धारा 111, 3(5) BNS

धारा 66(D) IT Act


को भी जोड़ा है। पुलिस ने आरोपियों से चार मोबाइल फोन भी जप्त किए हैं, जिनसे ठगी के महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना है।




पूरी राशि गिरोह के खातों में जमा होने की पुष्टि, रिकवरी प्रक्रिया जारी

जांच में यह प्रमाणित हुआ है कि पीड़ित उद्योगकर्मी दंपत्ति द्वारा दी गई पूरी 1.08 करोड़ रुपये की राशि सीधे या परोक्ष रूप से इसी गिरोह के खातों में जमा हुई है। पुलिस अब राशि की रिकवरी को लेकर विभिन्न बैंकों और वित्तीय एजेंसियों से समन्वय कर रही है।




गिरफ्तार आरोपी

1. यासीर शॉफी चारलू, उम्र 23 साल
निवासी – नाईच कदल रंजर मस्जिद, श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)


2. साकीब फारूखदार, उम्र 24 साल
निवासी – बटमालू फिरोदासबाद, श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)


3. मेहराजउद्दीन असाई, उम्र 57 साल
निवासी – सुतरासाई करमनगर, थाना शहीदगंज, श्रीनगर


4. अर्शलन अफॉक, उम्र 21 साल
निवासी – सुतरासाई करमनगर, श्रीनगर






एसपी दिव्यांग पटेल की सक्रिय मॉनिटरिंग से मिली सफलता

एसपी श्री दिव्यांग कुमार पटेल ने इस प्रकरण की सीधे मॉनिटरिंग की और सीएसपी मयंक मिश्रा तथा साइबर सेल डीएसपी अनिल विश्वकर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। तकनीकी विश्लेषण, बैंक ट्रांजैक्शन ट्रेल, मोबाइल नंबरों की लोकेशन और लगातार समन्वय के चलते पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली।




रायगढ़ पुलिस की अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—

किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग, क्रिप्टो या फॉरेक्स प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसकी विश्वसनीयता अवश्य जांचें।

यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम या व्हाट्सऐप पर मिलने वाले निवेश के किसी भी प्रलोभन से सतर्क रहें।

किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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