जाति प्रमाण पत्र सत्यापन मामला: विधायक शकुन्तला सिंह पोर्ते को सत्यापन समिति के समक्ष पेश होने का निर्देश, मामले पर पुरे जिले की नजर

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जाति प्रमाण पत्र सत्यापन मामला: विधायक शकुन्तला सिंह को समिति के समक्ष पेश होने का निर्देश
27 नवंबर को जिला स्तरीय समिति करेगी सुनवाई, मामले पर पूरे जिले की नजर

बलरामपुर-रामानुजगंज (छत्तीसगढ़)
जिला मुख्यालय बलरामपुर-रामानुजगंज से 17 नवंबर 2025 को जारी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश ने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। कलेक्टर कार्यालय (आदिवासी विकास शाखा) की ओर से जारी इस पत्र में प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती शकुन्तला सिंह पोर्ते को उनके जाति प्रमाण पत्र सत्यापन के संबंध में जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

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क्या है पूरा मामला?

जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की अध्यक्षता कलेक्टर द्वारा की जाती है। इसी समिति ने विधायक शकुन्तला सिंह को 27 नवंबर 2025, प्रातः 11 बजे स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होने और सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है।

इस जांच का आधार दो शिकायतें हैं, जो निम्न आवेदकों द्वारा प्रस्तुत की गईं—

1. धन सिंह धुर्वे, पोस्ट नवागढ़


2. जयश्री सिंह पुसाम पोर्ते, ग्राम गोरमाटी, महेया (वाड्रफनगर)



इन्हीं शिकायतों के आधार पर विधायक के स्थायी जाति प्रमाण-पत्र की सत्यता की जांच की जा रही है।

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उच्च न्यायालय की भी नजर

शिकायतकर्ताओं में शामिल जयश्री सिंह पुसाम पोर्ते ने इस मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका क्रमांक WPC No. 2966/2025 दायर की है।
अदालत ने जिला स्तरीय समिति को इस मामले में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत के निर्देश के बाद प्रशासन ने तेजी से प्रक्रिया आगे बढ़ाई और विधायक को नोटिस जारी किया।




कौन-कौन से दस्तावेज मांगे गए?

जिला स्तरीय समिति ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन प्रक्रिया में निम्नलिखित मूल दस्तावेजों की जांच आवश्यक है—

1. जन्म-मृत्यु संबंधी पंजीयन


2. शालेय दाखिल-खारिज पंजी


3. निवास संबंधी अभिलेख


4. तथा अन्य सभी सुसंगत दस्तावेज, जिनके आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था।



समिति ने इन सभी कागजातों को मूल रूप से प्रस्तुत करना अनिवार्य बताया है।

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केंद्र में क्यों है यह मामला?

विधायक शकुन्तला सिंह पोर्ते आदिवासी क्षेत्र प्रतापपुर से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। इस कारण उनका जाति प्रमाण पत्र न केवल व्यक्तिगत दस्तावेज है, बल्कि उनकी विधायक योग्यता एवं आरक्षण पात्रता से भी जुड़ता है।
इसी वजह से इस जांच को राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।




किस-किस को भेजी गई प्रतिलिपि?

प्रशासन की ओर से जारी इस पत्र की प्रतिलिपि निम्न अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों को भेजी गई—

कलेक्टर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज

अपर कलेक्टर (एटीडी शाखा)

अनुविभागीय अधिकारी (रा.), वाड्रफनगर

तहसीलदार, वाड्रफनगर

नोडल संयोजक, वाड्रफनगर

आवेदक धन सिंह धुर्वे

आवेदक जयश्री सिंह पुसाम पोर्ते


यह दर्शाता है कि मामले को प्रशासनिक स्तर पर अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है।




27 नवंबर को होगी अहम सुनवाई

जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की 27 नवंबर 2025 को होने वाली सुनवाई पर जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

इस दिन यह स्पष्ट हो सकता है कि:

क्या विधायक शकुन्तला सिंह का जाति प्रमाण-पत्र वैध है?

या शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवालों में दम है?


मामले के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए सुनवाई के दिन जिला मुख्यालय में हलचल रहने की संभावना है।

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