
तिल्दा नेवरा में खुलेआम जुआ, सट्टा और नशे का कारोबार — प्रशासन की नींद कब टूटेगी?
तिल्दा टाइम्स | CG न्यूज रिपोर्ट | तिल्दा नेवरा
तिल्दा नेवरा।
नगर की सड़कों पर कानून का साया दिन-ब-दिन कमजोर होता जा रहा है। ओवरब्रिज के पास खुलेआम जुएं और सट्टे का अड्डा संचालित हो रहा है, जहां हर शाम नोटों की गड्डियां उड़ती हैं और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।
ओवरब्रिज के पास जुएं और सट्टे का साम्राज्य
शहर के ओवरब्रिज के आसपास का इलाका अब “सट्टा बाजार” के नाम से कुख्यात होता जा रहा है। हर शाम यहां सैकड़ों लोग जमा होते हैं, जहां जुएं की पर्चियां, नोटों की अदला-बदली और हार-जीत के शोर से माहौल गूंजता रहता है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उल्टा, शिकायतकर्ताओं को धमकियां मिलने की खबरें भी सामने आई हैं।
नशे का जाल — युवा पीढ़ी खतरे में
सिर्फ जुआ ही नहीं, बल्कि नशे का कारोबार भी तेजी से अपने पैर पसार रहा है। शराब, गांजा और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री अब आम बात हो गई है। स्कूल और कॉलेज के युवा इस दलदल में फंसते जा रहे हैं। मोहल्लों में देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां चलती रहती हैं, जिससे आम जनता में भय और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई तो तिल्दा नेवरा का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
गुंडागर्दी और असामाजिक तत्वों का बोलबाला
इलाके में असामाजिक तत्वों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे खुलेआम लोगों से वसूली, धमकाने और मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। राह चलते लोगों से झगड़े और बदसलूकी की घटनाएं आम हो गई हैं। इससे स्थानीय व्यापारी और परिवार दोनों असहज महसूस कर रहे हैं।
कई दुकानदारों ने बताया कि “रात में दुकान बंद करने के बाद घर पहुंचना भी अब सुरक्षित नहीं रहा। पुलिस गश्त का नाम तो है, पर वह सिर्फ कागजों में दिखाई देती है।”
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
जनता का सीधा सवाल है — आखिर प्रशासन की चुप्पी क्यों?
क्या कानून के रखवाले इन गैरकानूनी गतिविधियों से अनजान हैं या फिर किसी दबाव में आंखें मूंद रखी हैं?
नागरिकों का कहना है कि अगर पुलिस चाह ले तो 24 घंटे में इन गोरखधंधों को बंद कर सकती है। मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावटी छापे और कुछ गिरफ्तारियां करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
जनता की चेतावनी — “अब बहुत हुआ!”
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
लोगों का कहना है —
> “हम अब खामोश नहीं रहेंगे। अगर प्रशासन नहीं जागा, तो जनता खुद सड़कों पर उतरेगी।”
निष्कर्ष
तिल्दा नेवरा का यह हाल बताता है कि अपराध और नशे का जाल अब शहर की नसों में फैल चुका है। जरूरत है तो सिर्फ ईमानदार और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की। जनता अब जाग चुकी है — सवाल है, क्या प्रशासन भी जागेगा?

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
