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आर.के.एम. पावर प्लांट, डभरा में दर्दनाक हादसा: चार मजदूरों की मौत, छह घायल – पहली बार कंपनी निदेशकों पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज, मुआवजे को लेकर घमासान
रायगढ़-सक्ती/तिल्दा टाइम्स CG न्यूज, 9 अक्टूबर 2025:
छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले में स्थित आर.के.एम. पावर प्लांट, डभरा में 7 अक्टूबर को घटित एक भीषण औद्योगिक दुर्घटना ने राज्य में औद्योगिक सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। इस हादसे में अब तक चार मजदूरों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई अभूतपूर्व कार्रवाई ने इसे एक ऐतिहासिक मिसाल बना दिया है।
हादसे का विवरण
7 अक्टूबर की सुबह, आर.के.एम. पावर प्लांट के बॉयलर सेक्शन में मेंटेनेंस का कार्य चल रहा था। इस दौरान 10 मजदूर एक औद्योगिक लिफ्ट के माध्यम से ऊंचाई पर कार्यस्थल की ओर जा रहे थे। अचानक लिफ्ट 40 मीटर की ऊंचाई से टूटकर नीचे गिर गई, जिससे 3 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई और 7 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद प्लांट में अफरातफरी मच गई और चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।
मृतकों में अंजनी कुमार, मिश्रीलाल, रविंद्र कुमार और एक अज्ञात श्रमिक शामिल हैं। घायलों को तत्क्षण रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक श्रमिक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
जवाबदेही और पुलिस कार्रवाई
घटना के बाद मजदूरों और उनके परिजनों ने प्लांट प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू किया। आरोप है कि लिफ्ट की तकनीकी जांच व रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई थी।
सक्ति पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की। पुलिस महानिरीक्षक संजय शुक्ला और पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और तकनीकी लापरवाही की पुष्टि हुई।
इस आधार पर पुलिस ने आर.के.एम. पावर जेनरेशन कंपनी के निदेशकों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है।
अभियुक्तों की सूची
कंपनी के निदेशक:
डॉ. अंडल अरमुगम
टी.एम. सिंगरवेल
प्लांट के अधिकारी:
प्लांट हेड एवं एडिशनल डायरेक्टर
फैक्ट्री मैनेजर: सम्मुख राव
बॉयलर एवं टर्बाइन मेंटेनेंस हेड: कमलेश कुमार अग्रवाल
सेफ्टी ऑफिसर: मनोज राउत
पी एंड एम मेंटेनेंस अधिकारी: वेसलीमणि
लिफ्ट इंजीनियर: कृष्णा गौरव
मुआवजे को लेकर गतिरोध – पोस्टमार्टम रुका
इस हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और कंपनी प्रबंधन के बीच मुआवजे की राशि को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसका असर इतना गंभीर है कि मृतकों का पोस्टमार्टम भी रुका हुआ है। परिजन रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल के बाहर डटे हुए हैं और उचित मुआवजा मिलने तक शव लेने से इंकार कर रहे हैं।
धरने की चेतावनी
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से आए 40 से अधिक परिजनों ने बताया कि न तो ठहरने की व्यवस्था की गई है, न ही प्रशासन की ओर से कोई वरिष्ठ अधिकारी अब तक उनसे मिलने पहुंचा है। गुस्साए परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि कल तक कोई समाधान नहीं निकला तो वे आर.के.एम. पावर प्लांट के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना देंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और परिजनों से बातचीत कर समाधान निकालने की बात कही है। वहीं, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और घायलों के इलाज की व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य में पहली बार मालिकों पर दर्ज हुआ केस – एक नजीर
यह छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा मामला है, जिसमें किसी औद्योगिक हादसे में सीधे कंपनी के निदेशकों और मालिकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया है। इससे औद्योगिक सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होती रही, तो आने वाले समय में श्रमिकों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही में निश्चित रूप से कमी आएगी।
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अंतिम टिप्पणी:
डभरा पावर प्लांट हादसा न केवल एक औद्योगिक त्रासदी है, बल्कि यह श्रमिकों की सुरक्षा और उद्योग प्रबंधन की जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल है। मृतकों के परिजनों को जल्द न्याय और उचित मुआवजा मिले, यही शासन-प्रशासन से जन अपेक्षा है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
