
तिल्दा नेवरा: नहर में नहाने गए मासूम की दर्दनाक मौत, वार्ड क्रमांक 18 के सुरेश देवांगन की डूबने से गई जान
तिल्दा नेवरा (छत्तीसगढ़), 30 सितंबर 2025 — नगर के वार्ड क्रमांक 18 में रहने वाले एक मासूम बालक सुरेश देवांगन (उम्र लगभग 13 वर्ष) की नहर में डूबने से मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा सोमवार को उस समय हुआ जब सुरेश अपने दोस्तों के साथ नहर में नहाने गया था। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

घटना की पूरी जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह लगभग 10 बजे सुरेश अपने कुछ दोस्तों के साथ तिल्दा नेवरा के पास स्थित नहर में नहाने के लिए गया था। बच्चों के लिए यह एक सामान्य दिन की तरह था, लेकिन यह दिन सुरेश और उसके परिवार के लिए कभी न भूलने वाला बन गया।
बताया जा रहा है कि पानी में छलांग लगाने के कुछ ही क्षणों बाद सुरेश गहराई में चला गया और डूबने लगा। यह देखकर उसके साथ मौजूद साथी घबरा गए और डर गए,डर स किसी को घटना की जानकारी नहीं दी। उन्होंने यह बात घर-परिवार या आसपास के किसी बड़े को भी नहीं बताई।

परिवार की बेचैनी और रात भर की खोजबीन
शाम तक जब सुरेश घर नहीं लौटा तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। पहले उन्होंने सोचा कि शायद वह दोस्तों के साथ कहीं खेल रहा होगा, लेकिन जब अंधेरा होने लगा और सुरेश का कुछ पता नहीं चला, तो घरवालों ने उसकी खोजबीन शुरू की। आस-पड़ोस में पूछताछ की गई, रिश्तेदारों से संपर्क किया गया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। रातभर परिजन परेशान और चिंतित रहे, पर कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
सुबह मिला शव, गांव में मचा कोहराम
मंगलवार सुबह लगभग 10 बजे कुछ ग्रामीणों ने नहर में एक शव को तैरते हुए देखा। तुरंत इसकी सूचना तिल्दा पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नहर से बाहर निकलवाया। बाहर निकालने पर शव का शिनाक्त सुरेश देवांंगन के रूप मे हुई ,तिल्दा पुलिस शव को अपने कब्जे मे लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, प्राथमिक जांच में यह मामला दुर्घटनावश डूबने का प्रतीत हुआ ,
गांव में शोक की लहर
घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। स्कूल, पड़ोस और मोहल्ले में जहां-जहां सुरेश के जानने वाले थे, वहां मातम पसरा हुआ है। परिजन इस अचानक हुए हादसे से टूट चुके हैं और उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि उनका चहेता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है।
यह घटना न सिर्फ एक मासूम की जान जाने का मामला है, बल्कि एक चेतावनी भी है कि बच्चों को अनदेखी खतरों से कैसे बचाया जाए। समय रहते जागरूकता और सावधानी ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
