तिल्दा नेवरा की बेटी जिया रानी ने राज्य स्तरीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता में जिता रजक पदक,क्षेत्र में खुशी की लहर

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तिल्दा नेवरा की बेटी जिया रानी ने राज्य स्तरीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता में जीता रजत पदक, क्षेत्र में खुशी की लहर
सरकार से खेल साधनों की मांग, राष्ट्रीय स्तर पर स्थान बनाने से चूकीं जिया

तिल्दा नेवरा, 13 सितंबर।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन में 4 से 7 सितंबर तक आयोजित राज्य स्तरीय भारोत्तोलन प्रतियोगिता में तिल्दा नेवरा क्षेत्र की एक प्रतिभाशाली छात्रा ने अपनी मेहनत और लगन से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरोरा की कक्षा 12वीं की छात्रा जिया रानी चतुर्वेदी ने +77 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीतकर क्षेत्रवासियों के साथ-साथ विद्यालय परिवार को भी गर्व महसूस कराया है।

कठिन परिश्रम और समर्पण का फल

जिया रानी की इस सफलता के पीछे उनका कठिन परिश्रम और संकल्प है। उनकी कोच अंजलि देवदास ने बताया कि जिया ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद निरंतर अभ्यास कर यह मुकाम हासिल किया। वे बताती हैं कि जिया रानी बहुत ही समर्पित और मेहनती खिलाड़ी हैं।
“वह महज कुछ अंकों के अंतर से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चयन से चूक गईं। इसका मुख्य कारण खेल संसाधनों की कमी है। यदि हमारे खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय स्तर जैसी सुविधाएं मिलें, तो वे निश्चित रूप से देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं,” — कोच अंजलि ने कहा।

संसाधनों की कमी बनी बाधा

इस उपलब्धि ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को उजागर किया है। प्रशिक्षण के लिए आधुनिक उपकरणों, उचित आहार योजना, और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की कमी के चलते जिया जैसी होनहार खिलाड़ी राष्ट्रीय पटल तक पहुंचने से वंचित रह जाती हैं।

विद्यालय और ग्रामवासियों में उत्साह

जिया की इस सफलता पर विद्यालय परिवार और ग्राम सरोरा में उत्सव जैसा माहौल है। विद्यालय के प्राचार्य अनिल वर्मा ने छात्रा को बधाई देते हुए कहा, “यह उपलब्धि हमारे लिए गौरव की बात है। हम राज्य सरकार और खेल विभाग से निवेदन करते हैं कि ऐसे होनहार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण सुविधा, खेल सामग्री और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।”

विद्यालय के समस्त शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने जिया रानी को फूल-मालाओं से सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाया। ग्रामवासियों ने भी ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत कर अपनी खुशी व्यक्त की।

भविष्य के लिए संकल्प

जिया रानी ने अपनी सफलता को गांव की बेटियों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा, “मैंने सपना देखा था कि एक दिन अपने गांव और विद्यालय का नाम रोशन करूं। यह शुरुआत है, मैं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना चाहती हूं और इसके लिए मैं दोगुनी मेहनत करूंगी।”

मांग: खिलाड़ियों को मिले बेहतर सुविधाएं

इस अवसर पर विद्यालय स्टाफ और ग्रामवासियों ने शासन से अपील की कि ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी वह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जो शहरी खिलाड़ियों को मिलती हैं। ताकि वे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकें और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें।




यह सफलता केवल एक पदक नहीं, बल्कि उस उम्मीद की किरण है जो बताती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती — जरूरत होती है तो बस उसे पहचानने और समर्थन देने की।




रिपोर्टर:अनिल कुमार भट्ट
तिल्दा टाइम्स CG न्यूज

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