
तिल्दा टाइम्स CG न्यूज
संवाददाता: अनिल कुमार भट्ट
स्थान: ग्राम पंचायत अल्दा, जिला रायपुर (छत्तीसगढ़)
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ग्राम पंचायत अल्दा में फर्जी एनओसी प्रकरण गरमाया, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश
यदि 7 दिनों में जाँच प्रतिवेदन नहीं मिला, तो SDM कार्यालय का घेराव होगा: ग्रामीणों की चेतावनी
ग्राम पंचायत अल्दा में चल रहे कथित फर्जी एनओसी प्रकरण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व सरपंच श्रीमती केशर वर्मा ने उद्योग स्थापना के लिए श्री बालाजी स्पंज एवं पावर प्राइवेट लिमिटेड को फर्जी तरीके से ग्रामसभा की सहमति (NOC) प्रदान की है।
इस प्रकरण के प्रकाश में आने के बाद ग्रामीणों ने भारी संख्या में थाना नेवरा तिल्दा पहुंचकर FIR दर्ज कराने की मांग की थी। घटना स्थल पर पहुंचे अनुविभागीय अधिकारी (SDM) ने तत्काल जाँच का आश्वासन दिया और एक उच्चस्तरीय जाँच टीम का गठन किया गया।

जाँच टीम में कौन-कौन शामिल था?
जनपद CEO
तहसीलदार
नायब तहसीलदार
पुलिस विभाग के अधिकारी
इस टीम ने गांव में पहुँचकर 11 ग्रामीणों के बयान दर्ज किए, जिनमें सभी ने ग्रामसभा रजिस्टर में हेराफेरी की पुष्टि की है।
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ग्रामीणों का आरोप और मांगें:
ग्रामीणों का कहना है कि
एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जाँच प्रतिवेदन नहीं दिया गया।
20 अगस्त को दोबारा बड़ी संख्या में ग्रामीण SDM कार्यालय पहुंचे और लिखित आवेदन देकर 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया।
यदि जाँच प्रतिवेदन की प्रति उन्हें 7 दिनों के भीतर नहीं सौंपी जाती, तो वे SDM कार्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

मामले की मुख्य बातें संक्षेप में:
🔸 फर्जी एनओसी का आरोप:
पूर्व सरपंच पर श्री बालाजी स्पंज एवं पावर प्राइवेट लिमिटेड को फर्जी ग्रामसभा सहमति देने का आरोप।
🔸 ग्रामीणों की FIR की मांग:
ग्रामीणों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें जांच पूरी होने के बाद का आश्वासन दिया गया।
🔸 जाँच टीम का गठन और बयान:
गठित टीम ने 11 लोगों के बयान दर्ज किए, जिन्होंने ग्रामसभा रजिस्टर में गड़बड़ी की पुष्टि की।
🔸 प्रतिवेदन की मांग:
ग्रामीण जाँच प्रतिवेदन की प्रति प्राप्त करना चाहते हैं ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सके।
🔸 धरने की चेतावनी:
7 दिनों में रिपोर्ट नहीं मिलने पर कार्यालय का घेराव करने और धरना देने की चेतावनी।
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प्रशासन की अगली चाल पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजरें अनुविभागीय अधिकारी पर टिकी हैं कि वे ग्रामीणों की मांगों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या समय रहते जाँच प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाता है या नहीं।
यदि प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह मामला बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।
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🖋 रिपोर्ट: अनिल कुमार भट्ट

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
