धरसींवा में बैंक धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा: आईडीबीआई बैंक चरौदा शाखा में 1 करोड़ से अधिक के गबन की आशंका, 15 से ज्यादा पीड़ित सामने आए

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धरसींवा में बैंक धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा: आईडीबीआई बैंक चरौदा शाखा में 1 करोड़ से अधिक के गबन की आशंका, 15 से ज्यादा पीड़ित सामने आए


धरसींवा/रायपुर। रायपुर जिले के धरसींवा क्षेत्र स्थित आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा में सामने आया धोखाधड़ी का मामला अब लगातार बड़ा होता जा रहा है। शुरुआत में यह मामला एक दंपत्ति के साथ 40 लाख रुपये की ठगी तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए-नए पीड़ित सामने आ रहे हैं। अब तक 15 से अधिक लोगों ने इसी तरह की ठगी का आरोप लगाया है और प्रारंभिक जांच में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन की आशंका जताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर पीड़ितों की संख्या और भी बढ़ सकती है।


भरोसे का फायदा उठाकर की गई ठगी


मामले की शुरुआत तब हुई जब धरसींवा निवासी नरेंद्र कुमार वर्मा और उनकी पत्नी मनीषा वर्मा ने अपनी जीवनभर की बचत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से फिक्स डिपॉजिट कराने का निर्णय लिया। दंपत्ति ने 20-20 लाख रुपये की राशि एफडी कराने के लिए आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा का रुख किया।


बैंक पहुंचने पर उनकी मुलाकात बैंक में कार्यरत अस्थायी कर्मचारी राजा खुटे से हुई, जिससे उनका पहले से परिचय था। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए आरोपी ने एफडी कराने की प्रक्रिया बताकर उनसे आधार कार्ड और पैन कार्ड की प्रतियां लीं, साथ ही दो ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर भी करवा लिए। बाद में आरोपी ने उन्हें कथित रूप से एफडी की एक पावती भी दे दी, जिससे दंपत्ति को विश्वास हो गया कि उनकी राशि सुरक्षित निवेश हो गई है।


एफडी तुड़वाने पहुंचे तो खुला राज


धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब 2 मार्च 2026 को नरेंद्र वर्मा को पैसों की जरूरत पड़ी और उन्होंने एफडी तोड़ने के लिए आरोपी से संपर्क किया। आरोपी के गोलमोल जवाबों से संदेह होने पर वे सीधे बैंक पहुंचे और अपने खाते का स्टेटमेंट निकलवाया।


स्टेटमेंट देखकर उनके होश उड़ गए। खाते से 40 लाख रुपये की पूरी राशि अलग-अलग तारीखों में निकाली जा चुकी थी। जांच में सामने आया कि आरोपी ने ब्लैंक चेक का इस्तेमाल करते हुए रकम को अन्य व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर कर निकाला था।


आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजा गया


मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी राजा खुटे को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब आरोपी से जुड़े बैंक लेन-देन और खातों की भी जांच कर रही है।


मामला सामने आते ही बढ़ने लगे पीड़ित


जैसे ही यह मामला मीडिया में आया, उसी प्रकार की ठगी का शिकार हुए अन्य लोग भी सामने आने लगे। अब तक लगभग 15 से अधिक लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके साथ भी इसी तरह का धोखाधड़ी का तरीका अपनाया गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार कुल ठगी की राशि एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है और यह आंकड़ा आगे बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।


थाने में बैंक प्रबंधन से आमने-सामने चर्चा


गुरुवार 12 मार्च को सभी पीड़ितों ने संयुक्त रूप से धरसीवां थाने में आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान थाना प्रभारी की मौजूदगी में प्रार्थियों और बैंक के वर्तमान शाखा प्रबंधक के बीच आमने-सामने चर्चा भी हुई।


पीड़ितों द्वारा पूछे गए सवालों पर शाखा प्रबंधक स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि यह घटना पूर्व शाखा प्रबंधक के कार्यकाल के दौरान हुई थी और मामले की जांच चल रही है। साथ ही उन्होंने शिकायत दर्ज कराने के लिए रायपुर स्थित बैंक के हेड ऑफिस जाने की सलाह दी।


बैंक के आंतरिक तंत्र पर उठे सवाल


इस पूरे मामले के सामने आने के बाद बैंक के आंतरिक निगरानी तंत्र और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। इतनी बड़ी राशि का लेन-देन बिना बैंक के आंतरिक स्तर पर जानकारी के होना मुश्किल माना जा रहा है।


पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण के निर्देशन में चल रही जांच में तत्कालीन शाखा प्रबंधक, कैशियर और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन डिटेल और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।


और बड़े खुलासों की संभावनाए


सूत्रों के अनुसार यह मामला केवल एक कर्मचारी की करतूत तक सीमित नहीं हो सकता। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस धोखाधड़ी में बैंक के अन्य कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस बैंक घोटाले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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