बालोद में धान परिवहन पर बड़ा सवाल, धान खरीदी केन्द्र से धान लोड करके निकला ट्रक 4 दिन बाद जंगल में मिला,हाईटेक GPS मॉनिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल

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बालोद में धान परिवहन पर बड़ा सवाल
धान खरीदी केंद्र से निकला ट्रक 4 दिन बाद जंगल में मिला, हाईटेक GPS मॉनिटरिंग पर उठे गंभीर सवाल


बालोद | तिल्दा टाइम्स CG न्यूज
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और परिवहन व्यवस्था को लेकर एक के बाद एक सामने आ रहे घोटालों की कड़ी में अब बालोद जिले का नाम भी जुड़ गया है। कवर्धा में सामने आए धान घोटाले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि गुंडरदेही ब्लॉक से एक और चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है।


कोड़ेवा धान खरीदी केंद्र से 900 बोरी धान लेकर निकला ट्रक चार दिन तक लापता रहा और बाद में बालोद-कांकेर सीमा से लगे घने जंगल में लावारिस हालत में बरामद हुआ।


यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती है, बल्कि धान परिवहन में पारदर्शिता और GPS आधारित निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।


40 किलोमीटर का सफर, 4 दिन का रहस्य
जानकारी के मुताबिक, 13 जनवरी को गुंडरदेही ब्लॉक के कोड़ेवा धान खरीदी केंद्र से करीब 900 बोरी धान एक ट्रक में लोड कर संग्रहण केंद्र के लिए रवाना किया गया था।
इस ट्रक को केवल 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी, लेकिन निर्धारित समय पर ट्रक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचा।

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हैरानी की बात यह रही कि—
न तो संबंधित अधिकारी सतर्क हुए
न ही धान परिवहन से जुड़े कर्मचारी
और न ही ट्रांसपोर्टर ने ट्रक की लोकेशन को लेकर तत्काल कोई कार्रवाई की
चार दिनों तक ट्रक के गायब रहने के बावजूद सिस्टम पूरी तरह खामोश रहा।


जंगल में लावारिस खड़ा मिला धान से भरा ट्रक
शनिवार को बालोद-कांकेर सीमा पर स्थित ग्राम बढ़भूम दमकसा के पास घने जंगल में ग्रामीणों ने सड़क किनारे एक ट्रक को लावारिस हालत में खड़ा देखा।


ट्रक में धान भरा हुआ था, जिससे ग्रामीणों को संदेह हुआ। तत्काल इसकी सूचना प्रशासन को दी गई।


रात में जब प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, तो वहां मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।


ग्रामीणों ने—
धान परिवहन में लापरवाही
प्रशासनिक निगरानी की विफलता
और संभावित घोटाले को लेकर कड़े सवाल खड़े किए
स्थिति को देखते हुए मौके पर काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।


GPS ट्रैकिंग पर ‘सिस्टम’ की चुप्पी
जिला प्रशासन लगातार दावा करता रहा है कि धान खरीदी से लेकर परिवहन तक हर चरण की मिनट-टू-मिनट GPS ट्रैकिंग की जाती है।

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ऐसे में यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है—
यदि ट्रक ने अपना निर्धारित रूट बदला, तो कंट्रोल रूम को अलर्ट क्यों नहीं मिला?


चार दिन तक ट्रक एक ही जगह खड़ा रहा, फिर भी GPS सिस्टम निष्क्रिय क्यों रहा?


क्या यह तकनीकी खराबी थी या जानबूझकर सिस्टम को निष्क्रिय किया गया?


क्या धान की अफरा-तफरी के पीछे कोई सुनियोजित साजिश है?


इन सवालों ने पूरे धान परिवहन तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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जिला विपणन अधिकारी का बयान
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विपणन अधिकारी टिकेंद्र राठौर ने कहा—
“मामले की पूरी जांच कराई जा रही है। ट्रक वहां कैसे पहुंचा और इसके पीछे क्या कारण हैं, यह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। यदि किसी की लापरवाही या संलिप्तता पाई जाती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”


हालांकि अब तक किसी अधिकारी या ट्रांसपोर्टर पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई है।


बड़े घोटाले की आशंका से इनकार नहीं
घने जंगल में धान से लदे ट्रक का मिलना महज संयोग नहीं माना जा रहा।


सूत्रों के अनुसार आशंका जताई जा रही है कि—
धान को अवैध रूप से कहीं और खपाने की तैयारी थी
या फिर ट्रक चालक और ट्रांसपोर्टर की मिलीभगत से धान को गायब करने की कोशिश की गई
संभव है कि किसी “सुरक्षित मौके” का इंतजार किया जा रहा हो


फिलहाल प्रशासन ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है और जांच शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना बालोद जिले में धान परिवहन की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है।


अब सवाल यह है
क्या जांच के नाम पर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा,


या फिर वास्तव में दोषियों तक पहुंचकर धान घोटालों पर लगाम लगेगी?
जांच रिपोर्ट का इंतजार है…

तिल्दा टाइम्स CG न्यूज

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