बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव 2024-25 रद्द — रजिस्ट्रार ने अनियमितताओं का हवाला देकर दी बड़ी कार्रवाई, नए अधिकारी की देखरेख में फिर होगी मतदान प्रक्रिया

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अधिकारी ने उन्हें “असत्य एवं आधारहीन” बताते हुए खारिज कर दिया।
निर्वाचन अधिकारी की मनमानी रजिस्ट्रार एवं सहायक पंजीयक द्वारा भेजे गए पत्रों का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया। इसके बावजूद अवैधानिक सदस्यों के आधार पर 19 सितंबर का चुनाव करा दिया गया।
चुनाव प्रतिवेदन जमा नहीं किया गया चुनाव संपन्न होने के बाद भी निर्वाचन प्रतिवेदन रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा नहीं किया गया।
विवादित कार्यकारिणी को भंग करते हुए कलेक्टर, बिलासपुर को नया प्रशासक नियुक्त किया गया है।


कलेक्टर अब अपनी ओर से किसी प्रशासनिक या राजस्व अधिकारी को नया निर्वाचन अधिकारी नामित करेंगे।


यह अधिकारी क्लब की नियमावली के अनुसार पारदर्शी एवं वैधानिक चुनाव कराएगा और उसे सभी आवश्यक अधिकार प्राप्त होंगे।


यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम-1973 (संशोधित 1998) की धारा 33(ग) के तहत की गई है। रजिस्ट्रार ने स्पष्ट कहा कि गंभीर अनियमितताओं और उच्चाधिकारियों के पत्रों की अनदेखी के कारण 19.09.2025 को हुए चुनाव को विधि मान्य नहीं माना जा सकता।

बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव 2024-25 रद्द — रजिस्ट्रार ने अनियमितताओं का हवाला देकर दी बड

बिलासपुर। बहुचर्चित बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव 2024-25 को लेकर आखिरकार वह फैसला आ गया है, जिसका पत्रकार समुदाय बेसब्री से इंतजार कर रहा था। रजिस्ट्रार, फर्म्स एंड सोसाइटीज़ विभाग ने 18 नवंबर 2025 को जारी आधिकारिक आदेश में पूरी चुनाव प्रक्रिया को असंवैधानिक और नियम विरुद्ध बताते हुए पूर्णतः रद्द कर दिया है। यह निर्णय चुनाव प्रक्रिया में लगातार सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आधार पर लिया गया है।




✦ क्यों रद्द किए गए चुनाव?

रजिस्ट्रार के आदेश में कई गंभीर खामियों और प्रक्रियागत लापरवाहियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

🔴 समयसीमा का पालन नहीं

निर्वाचन अधिकारी द्वारा आवेदन-पत्रों की छंटनी, प्रत्याशी सूची जारी करने, तथा दावा-आपत्तियों के निराकरण की रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं की गई। कई बार नोटिस भेजने के बावजूद निर्धारित समयसीमा को नजरअंदाज किया गया।

🔴 रजिस्ट्रार के पत्रों का संतोषजनक जवाब नहीं

रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगे गए, लेकिन निर्वाचन अधिकारी द्वारा इनका संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।

🔴 मतदाता सूची पर आपत्तियों का समाधान अधूरा

मतदाता सूची पर उठाई गई कई आपत्तियों का समुचित निराकरण नहीं किया गया, जिससे चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए।

🔴 नियम 27/28 का उल्लंघन

नियम 27/28 के तहत आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन रिपोर्ट निर्वाचन अधिकारी द्वारा जमा नहीं कराई गई। यह चुनाव प्रक्रिया को वैध ठहराने के लिए अनिवार्य था।

🔴 पारदर्शिता की कमी

लगातार निर्देश देने के बावजूद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई। रजिस्ट्रार ने इसको “बार-बार की अवहेलना और जिम्मेदारी से बचने” का मामला माना।

इन सभी कारणों के आधार पर रजिस्ट्रार ने यह मानते हुए कि चुनाव प्रक्रिया नियमों के विपरीत और त्रुटिपूर्ण है, इसे तुरंत प्रभाव से अमान्य घोषित कर दिया।




✦ विकास पैनल ने फैसले का स्वागत किया

विकास पैनल के सदस्यों ने इस फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों की विजय बताया है। उनका कहना है कि वे शुरुआत से ही चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात, अनियमितताओं और दस्तावेजी खामियों को लेकर आवाज उठा रहे थे।

पैनल का कहना है—

> “इस निर्णय से पत्रकारिता जगत में पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद मजबूत हुई है। प्रेस क्लब जैसी संस्था में अनुशासन और साफ-सुथरी चुनाव पद्धति अनिवार्य है।”



उन्होंने रजिस्ट्रार के इस कड़े कदम का स्वागत किया और कहा कि अब पत्रकार समाज को सही दिशा में ले जाने वाला निष्पक्ष चुनाव होने की संभावना बढ़ गई है।




✦ नए अधिकारी की देखरेख में फिर से होगा चुनाव

रजिस्ट्रार ने बिलासपुर कलेक्टर को निर्देशित किया है कि प्रेस क्लब चुनाव प्रक्रिया को अब एक नए प्रशासनिक/राजपत्रित अधिकारी की देखरेख में पुनः संचालित किया जाए।

नया अधिकारी—

पूरी प्रक्रिया नियमावली के अनुसार शून्य से शुरू करेगा

मतदाता सूची का पुनरीक्षण करेगा

नामांकन से मतगणना तक हर चरण की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा

सभी दस्तावेज और रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करेगा


इस निर्णय के बाद पत्रकार समुदाय में नई हलचल मच गई है और हर कोई अब निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित चुनाव की उम्मीद कर रहा है।




✦ पत्रकार समुदाय में नई उम्मीद

प्रेस क्लब चुनाव हमेशा से शहर के मीडिया जगत की प्रतिष्ठा और एकता का प्रतीक माने जाते हैं। चुनाव रद्द होने के बाद अब समुदाय में यह भावना उभर रही है कि—

गलत प्रक्रियाओं को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता

पारदर्शिता सर्वोपरि है

प्रशासन अब निगरानी को और अधिक मजबूत करेगा


ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नया अधिकारी किस तरह से निष्पक्ष एवं नियमसम्मत प्रक्रिया को अंजाम देता है।

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