
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर एसीबी की बड़ी कार्रवाई: मनेंद्रगढ़ और जांजगीर-चांपा में सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की ताबड़तोड़ कार्रवाई लगातार जारी है। बुधवार को एसीबी की सरगुजा और बिलासपुर टीमों ने दो अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। दोनों मामलों में अधिकारियों ने ठेकेदारों और जमीन मालिकों से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत दर्ज होने के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ा।
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पहला मामला: मनेंद्रगढ़ में पीडब्ल्यूडी सब इंजीनियर रिश्वत लेते गिरफ्तार
सरगुजा एसीबी की टीम ने मनेंद्रगढ़ में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सब इंजीनियर सी.पी. मिश्रा को 21 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, सब इंजीनियर मिश्रा ने ठेकेदार अंकित मिश्रा से निर्माण कार्य के बिल पास करने के एवज में 30 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। बातचीत के बाद सौदा 21 हजार रुपए में तय हुआ। ठेकेदार ने यह शिकायत एसीबी सरगुजा कार्यालय में दर्ज कराई, जिसके बाद टीम ने पूरी योजना तैयार की।
एसीबी ने शिकायत की पुष्टि करने के लिए ठेकेदार को रासायनिक पाउडर (ट्रैप केमिकल) लगे नोट देकर भेजा। जैसे ही ठेकेदार ने निर्धारित रकम सब इंजीनियर को सौंपी, टीम ने मौके पर दबिश दी और मिश्रा को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी के बाद एसीबी टीम ने आरोपी इंजीनियर के घर, कार्यालय और बैंक खातों की भी जांच की। जांच में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और नकदी जब्त की गई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
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दूसरा मामला: जांजगीर-चांपा में तीन अधिकारी एसीबी के हत्थे चढ़े
इसी दिन एसीबी बिलासपुर की टीम ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए जांजगीर-चांपा जिले के एसडीएम कार्यालय चांपा के भू-अर्जन शाखा में पदस्थ तीन कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इनमें पटवारी बाबू बिहारी सिंह, अमीन, और ऑपरेटर राजकुमार देवांगन शामिल हैं।
शिकायतकर्ता बुधराम धीवर ने बताया कि कोसमंदा गांव में नेशनल हाईवे निर्माण के लिए उनकी और उनकी बहन की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसके बदले सरकार ने अगस्त 2025 में 35.64 लाख रुपए का मुआवजा उनके खाते में जमा कराया।
लेकिन मुआवजा राशि निकलवाने के लिए उक्त कर्मचारियों ने उनसे 1.80 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की। शिकायत की पुष्टि होने पर एसीबी बिलासपुर ने एक जाल (ट्रैप ऑपरेशन) रचा। योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट देकर कार्यालय भेजा गया। जैसे ही कर्मचारियों ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने मौके पर दबिश देकर तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
एसीबी ने तीनों आरोपियों के कार्यालय और आवासीय परिसरों की तलाशी ली, जहां से महत्वपूर्ण दस्तावेज, नगद राशि और जमीन से जुड़े कागजात जब्त किए गए। सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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एसीबी की सख्त चेतावनी
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि राज्यभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। किसी भी सरकारी विभाग में रिश्वतखोरी की शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की रिश्वत मांगने या देने की जानकारी तुरंत एसीबी हेल्पलाइन या नजदीकी कार्यालय में दें।
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निष्कर्ष
एसीबी की इन लगातार कार्रवाइयों से यह स्पष्ट संदेश गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) राज्य में पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। जनता में भी अब यह विश्वास बढ़ रहा है कि शिकायत करने पर प्रशासन निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई कर रहा है।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
