तिल्दा नेवरा में सट्टे का साम्राज्य पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल

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तिल्दा-नेवरा में सट्टे का साम्राज्य: पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल

तिल्दा-नेवरा (छत्तीसगढ़):
तिल्दा-नेवरा नगर में सट्टे का अवैध कारोबार अब किसी राज की बात नहीं रही। यह कारोबार न केवल खुलेआम फल-फूल रहा है, बल्कि प्रशासन की नाक के नीचे, कानून को ठेंगा दिखाते हुए बेखौफ चल रहा है। रेलवे ओवरब्रिज के नीचे और कैंप क्षेत्र के भीतर रोज़ाना सैकड़ों की संख्या में लोग सट्टा खेलने और खिलाने में जुटे रहते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन को इस गतिविधि की भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?

सत्ता के साये में फलता-फूलता धंधा?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सट्टे के इस धंधे के पीछे कुछ “बड़े चेहरे” सक्रिय हैं। ये वो लोग हैं जिनकी पहुंच सत्ता और प्रशासन के उच्च स्तर तक है। आरोप यह भी है कि ये लोग राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हैं और पुलिस इन पर हाथ डालने से पहले सौ बार सोचती है।

एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हर कोई जानता है कि कौन चला रहा है ये कारोबार। पुलिस आएगी तो दो-चार छोटे लोगों को पकड़कर फोटो खिंचवाएगी और चली जाएगी। अगले ही दिन सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।”

कानून का डर किसे?

तिल्दा-नेवरा में सट्टा एक ‘सिस्टम’ का रूप ले चुका है। सुबह से लेकर देर रात तक यह सिलसिला जारी रहता है। खास बात यह है कि यह सब उन जगहों पर होता है जहां पुलिस की नियमित गश्त होती है, फिर भी कोई रोक-टोक नहीं होती।

इससे यही सवाल उठता है – क्या वाकई में प्रशासन इस काले कारोबार को रोकना चाहता है? या कहीं भीतर ही भीतर कोई ‘समझौता’ हो चुका है?

न्याय की उम्मीद किससे?

कई बार शिकायतें करने के बाद भी नतीजा सिफर रहा है। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आवाज़ उठाई, लेकिन उन्हें या तो चुप करा दिया गया या फिर उन्हें ही बदनाम करने की कोशिश की गई।

तिल्दा निवासियों का कहना हैं, “जब छोटे-छोटे दुकानदारों पर टैक्स और लाइसेंस को लेकर कार्रवाई होती है, तो सट्टे जैसे गैरकानूनी काम पर क्यों नहीं? क्या कानून सबके लिए बराबर नहीं है?”

प्रशासनिक चुप्पी पर जनता में आक्रोश

अब यह मामला केवल सट्टे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। यदि आज सट्टा किंग खुलेआम घूम रहे हैं, तो कल और कौन-कौन से अपराध इस शहर को निगल जाएंगे?

जनता पूछ रही है:

आखिर कब होगी इस अवैध धंधे पर रोक?

कब पुलिस असली सरगनाओं पर कार्रवाई करेगी?

क्या प्रशासन भी इस गोरखधंधे में हिस्सेदार बन चुका है?


हमारी मांग:

1. सट्टे के खिलाफ चल रहे अभियानों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।


2. केवल छोटे अपराधियों को पकड़ने की जगह मुख्य संचालकों को गिरफ्तार किया जाए।


3. हर थाने को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाए कि उनके क्षेत्र में अवैध सट्टा नहीं चले।


4. जनता को जागरूक कर सट्टा खेलने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जाए।






तिल्दा-नेवरा में अवैध सट्टे का खेल अब सिर्फ एक ‘खेल’ नहीं रहा, यह समाज को भीतर ही भीतर खोखला कर रहा है। अगर समय रहते प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। अब जनता को उम्मीद है कि कोई ऐसा अफसर आए, जो निडर होकर इस सट्टा साम्राज्य को ध्वस्त कर सके।




रिपोर्ट: तिल्दा टाइम्स CG न्यूज
आपकी आवाज़ – जनता की बात

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