भिलाई: नेशनल हाइवे 53 पर शराब दुकान के खिलाफ उग्र विरोध, महिलाएं और स्कूली बच्चे भी धरने में  शामिल

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नेशनल हाइवे 53 पर शराब दुकान के खिलाफ उग्र विरोध, महिलाएं और स्कूली बच्चे भी धरने में शामिल

खुर्शीपार, छत्तीसगढ़ | 26 सितंबर 2025
नेशनल हाइवे 53 पर स्थित खुर्शीपार चौक के पास शासकीय विदेशी शराब दुकान को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। बजरंग दल के सहयोग से क्षेत्रवासियों ने इस शराब दुकान के खिलाफ ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध के बाद, इसी वार्ड में एक हत्या की घटना सामने आने से मामला और भी संवेदनशील हो गया।

स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला आबकारी विभाग ने शराब दुकान को वर्तमान स्थान से हटाने की योजना बनाई थी। लेकिन विडंबना यह रही कि वैकल्पिक स्थान के रूप में विभाग को कोई भी रहवासी क्षेत्र से पर्याप्त दूरी पर उपयुक्त जगह नहीं मिल सकी। अंततः विभाग ने हाईवे से लगे एक अन्य दुकान को किराए पर लेकर शराब दुकान स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।

फिर भड़का विरोध, बढ़ी सुरक्षा

शराब दुकान के नए प्रस्तावित स्थान को लेकर भी स्थानीय नागरिकों का विरोध फिर से भड़क उठा। लोगों ने जगह बदलने के फैसले का खुलकर विरोध किया। विरोध की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी।

सहायक आबकारी अधिकारी का कहना है कि,

> “स्थानीय निवासियों की आपत्ति को गंभीरता से लिया गया है। विरोध करने वाले नागरिकों से चर्चा की जा रही है, उनकी सहमति के बिना शराब दुकान को चालू नहीं किया जाएगा।”



महिलाएं और स्कूली बच्चों की भागीदारी

प्रदर्शन में क्षेत्र की महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। हाथों में तख्तियाँ और नारों के साथ उन्होंने दुकान को किसी भी कीमत पर शुरू न करने देने की चेतावनी दी। धरना स्थल पर विरोध कर रही एक महिला ने बताया कि,

> “हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूल और बस्ती के पास शराब दुकान खोलना पूरी तरह गलत है।”



स्कूली छात्रों ने भी “शराब नहीं चाहिए”, “हमारे मोहल्ले को बचाओ” जैसे नारों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।

प्रशासन के रवैये पर सवाल

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जहां एक तरफ सरकार नशा मुक्ति की बात करती है, वहीं दूसरी ओर रहवासी इलाकों में शराब दुकान खोलने की अनुमति देना दोहरे मापदंड को दर्शाता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि शराब दुकानों को बसाहट से दूर स्थापित करना चाहिए, ताकि युवा वर्ग को इसकी लत से बचाया जा सके। हत्या जैसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि शराब की आसान उपलब्धता किस तरह सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचा रही है।




स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है। प्रशासन और विरोध कर रहे लोगों के बीच बातचीत जारी है। अब देखना यह होगा कि जिला आबकारी विभाग और प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करते हुए क्या फैसला लेते हैं।

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