
नशे के अवैध कारोबार से अर्जित करोड़ों की संपत्ति पर बिलासपुर पुलिस का निर्णायक प्रहार
– रिपोर्ट: तिल्दा टाइम्स | सी.जी.न्यूज पोर्टल
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ | 25 सितम्बर 2025:
बिलासपुर पुलिस ने नशे के काले कारोबार पर सख्त शिकंजा कसते हुए एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध कमाई अब सुरक्षित नहीं रह सकती। नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) की धारा 68-एफ के अंतर्गत की गई इस ताजा कार्रवाई में पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित लगभग ₹38.50 लाख की संपत्तियों को फ्रीज कर decisive कदम उठाया है।
केवल 50 दिनों में चिन्हित की गई संपत्तियाँ
पुलिस विभाग की टीम ने गहन विवेचना के बाद मात्र 50 दिनों में संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की। कार्रवाई की गति और प्रभावशीलता इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन अवैध मादक व्यापार के विरुद्ध पूर्णतः सजग और प्रतिबद्ध है।
मुख्य आरोपी: कांति पांडे और दीपक गंडा
कांति पांडे, निवासी चोरभट्ठी खुर्द, थाना सकरी, के विरुद्ध पूर्व में तीन प्रकरण दर्ज हैं। जांच में सामने आया कि उसने नशे के व्यापार से अर्जित धन से ₹15 लाख का मकान और ₹21 लाख की कृषि भूमि खरीदी थी। पुलिस ने इन दोनों संपत्तियों को फ्रीज कर लिया है।
वहीं दीपक गंडा, निवासी कोडपल्ला, अंबाभना (ओडिशा), पर अपराध क्रमांक 533/2025 धारा 20(बी), 29 NDPS Act के तहत मामला दर्ज है। उसके पास से ₹2.50 लाख नकद राशि जब्त की गई थी, जिसे अब फ्रीज कर लिया गया है।
अब तक 7 प्रकरण, 19 आरोपी, ₹7.40 करोड़ की जब्ती
बिलासपुर पुलिस ने अब तक NDPS एक्ट के अंतर्गत 7 अलग-अलग मामलों में 19 आरोपियों की संपत्तियाँ फ्रीज की हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹7.40 करोड़ है। यह राज्य में नशे के विरुद्ध चल रहे अभियान की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।
पुलिस अधीक्षक का बयान
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक ने कहा:
हमारा उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और आर्थिक आधार को भी ध्वस्त करना है। NDPS एक्ट की धारा 68-एफ के तहत संपत्ति जब्ती एक निर्णायक हथियार साबित हो रहा है।
संदेश साफ है: अवैध कमाई सुरक्षित नहीं
इस कार्रवाई से न केवल अपराधियों को सीधा संदेश गया है, बल्कि समाज में यह चेतावनी भी स्पष्ट हो गई है कि मादक पदार्थों का व्यापार न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे अर्जित हर संपत्ति पर भी अब कानून की पैनी नजर है।
रिपोर्ट: तिल्दा टाइम्स
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Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
