
कस्टोडियल डेथ केस: इंसाफ की ऐतिहासिक जीत, 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा
तारीख: 7 अप्रैल 2026 | स्थान: तमिलनाडु (थूथुकुडी/मदुरै)
भारतीय न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और सख्त संदेश देने वाले फैसले में मदुरै की विशेष अदालत ने बहुचर्चित सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 दोषी पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। यह मामला जून 2020 में सथानकुलम में हुई पिता-पुत्र की मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
क्या था पूरा मामला?
जून 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान थूथुकुडी जिले के सथानकुलम में पुलिस ने मोबाइल दुकान चलाने वाले पी. जयराज (58) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) को कथित तौर पर दुकान देर तक खुली रखने के आरोप में हिरासत में लिया था।
आरोप है कि पुलिस हिरासत के दौरान दोनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। गंभीर चोटों और आंतरिक रक्तस्राव के चलते 22 और 23 जून 2020 को अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।
यह घटना देशभर में पुलिस बर्बरता और मानवाधिकारों को लेकर एक बड़ा मुद्दा बन गई थी।
अदालत का फैसला: ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने इस मामले को ‘विरल से विरलतम’ (Rarest of Rare) मानते हुए दोषी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा:
“जिन्हें जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उन्होंने ही कानून का सबसे क्रूर उल्लंघन किया। यह केवल हत्या नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का गंभीर हनन है।”
जांच में कैसे खुला सच?
इस केस में सच्चाई सामने लाने में कई अहम पहलुओं ने निर्णायक भूमिका निभाई:
1. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच
CBI ने अपनी जांच में पाया कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR भ्रामक और तथ्यहीन थी।
2. महिला कांस्टेबल की साहसिक गवाही
थाने में मौजूद एक महिला हेड कांस्टेबल ने मजिस्ट्रेट के सामने प्रत्यक्षदर्शी गवाही दी, जिससे मामले को मजबूती मिली।
3. फोरेंसिक साक्ष्य
घटनास्थल से मिले खून के नमूने मृतकों के डीएनए से मेल खा गए, जिससे पुलिस का बचाव कमजोर पड़ गया।
दोषियों को सजा और जुर्माना
9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा
कुल ₹1.40 करोड़ का जुर्माना, जो पीड़ित परिवार को दिया जाएगा
एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है
परिवार की प्रतिक्रिया
पीड़ित परिवार ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह न्याय केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो पुलिसिया अत्याचार का शिकार होता है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत में कस्टोडियल टॉर्चर के मामलों में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
यह पुलिस जवाबदेही को मजबूत करेगा
भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की राह खोलेगा
हालांकि, दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार रहेगा।
क्यों है यह फैसला अहम?
पुलिस सुधार और जवाबदेही पर बड़ा असर
मानवाधिकार संरक्षण को मजबूती
न्यायपालिका का सख्त संदेश: कानून से ऊपर कोई नहीं
सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस का यह फैसला भारतीय न्यायपालिका की दृढ़ता और निष्पक्षता का प्रतीक माना जा रहा है। यह केवल एक मामले का अंत नहीं, बल्कि न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है ।

Anil Kumar Bhatt
Editor in Chief
